दिल्ली: नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति पास हो गया था । यह बात और है कि इसको लागू करने के लिए सरकार ने जातिगत जनगणना एवं परिसीमन का प्रावधान लगाया जिसका आधार 2021 की जनगणना होगी । जिसकी मियाद 2029 की होगी । अचानक ऐन चुनाव से पहले संसद के दोनों सदनों का विशेष सत्र बुलाकर इस अधिनियम का संशोधन बिल पेश किया गया जो कि 1/3 बहुमत ना मिल पाने के कारण ख़ारिज हो गया । अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की भूतपूर्व अध्यक्ष शोभा ओझा ने निशाना साधते हुए कहा कि प्रधान मंत्री महिला आरक्षण विधेयक के ना पास होने पर घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं जबकि यह 2023 में सर्व सम्मति से पास हो गया था । दरसल संशोधन की आड़ में सरकार परिसीमन कर लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करना चाहती थी जिसका आधार 2011 की जनगणना होना था ।
भूतपूर्व महिला कांग्रेस की अध्यक्षा का कहना है इन चुनाव से पहले अफ़रातफरी में सशोधन विधेयक का पटल पर लाने का मक़सद चुनावी फ़ायद उठाना है । यदि यह पास हो जाता तो वाहवाही और यदि ख़ारिज तो ठीकरा विपक्ष पर । अभी देश में असम, तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल सहित 6 राज्यों में चुनाव संभावित हैं । भाजपा एवं उसकी विचारधारा वाले वाले सभी संगठनों को महिला विरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी से पहले और आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया है । पंचायतीराज फ़ीसदी महिला आरक्षण का प्रस्ताव भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की अनुशंसा में नरसिम्हा राव की सरकार के शासनकाल में लागू हुआ था । यूपीए शासनकाल में 2010 में महिला आरक्षण विधेयक राज्य सभा में तो पास हुआ लेकिन लोकसभा में वोट संख्या कम होने के कारण ख़ारिज हो गया ।
2014 में इसे चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा सत्ता में आई लेकिन आज 11 साल बाद भी यह विधेयक लागू नहीं हो पाया है । स्वयं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खत के माध्यम से एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे मौजूदा सीटों में लागू किए जाने की माँग की । उनको अंदेशा है की मौजूदा सरकार 2034 तक अपनीकुर्सी नक्की करना चाहती है ।