आज विजयदशमी याने कि दशहरे के दिन जहाठदà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤° में रावण के पà¥à¤¤à¤²à¥‡ को जलाया जाता है , दिलà¥à¤²à¥€ से चंद किलोमीटर दूर à¤à¤• गाà¤à¤µ à¤à¤¸à¤¾ है जहाठरावण को जलाया नहीं जाता अपितॠउसकी पूजा होती है I जी हां हम बात कर रहे हैं गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° नोà¤à¤¡à¤¾ के बिसरक गांव की । दशहरे के दिन यहाठछा जाती है खामोशी I
यहाठके लोगों का मानना है कि रावण इसी गाà¤à¤µ का रहने वाला था । यहाठरावण दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शिव मंदिर है रावण ने अपने हाथों से शिव लिंग की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की थी । मंदिर के मà¥à¤–à¥à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤° पर रावण के पिता माता वा रावण की मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ हैं । मंदिर परिसर में निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कारà¥à¤¯ जारी है । मंदिर के महंत का कहना है कि निरà¥à¤®à¤¾à¤£à¤¾à¤§à¥€à¤¨ हिसà¥à¤¸à¥‡ में कà¥à¤¬à¥‡à¤°, विशà¥à¤µà¤•रà¥à¤®à¤¾ और रावण की मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ की जायेंगी । साथ ही धरà¥à¤®à¤¶à¤²à¤¾ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कारà¥à¤¯ à¤à¥€ जारी है जहाठपर à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ के रà¥à¤•ने के लिठमाकूल वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ होगी ।
यहाठसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¥€ मोहन मंदिर योगाशà¥à¤°à¤® टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ परिसर में रावण के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किये जाने के विरोध में अगसà¥à¤¤ के महीने में कà¥à¤› नकाबपोश यà¥à¤µà¤•ों के समà¥à¤¹ ने जबरन घà¥à¤¸à¤•र पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• को नषà¥à¤Ÿ कर दिया । आपसी समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ होने से मामले की पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ी दरà¥à¤œ नहीं हà¥à¤ˆ । लेकिन मामला मीडिया की सà¥à¤°à¥à¤–ियों में रहा ।
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बिसरख के अतिरिकà¥à¤¤ तीन जगह और रावण के मंदिर हैं । विà¤à¤¨à¥à¤¨ सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ जानकारी और उपलबà¥à¤§ दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° कानपà¥à¤° में दशानन रावण मंदिर, मधà¥à¤¯-पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के विदीशा में रावण गà¥à¤°à¤¾à¤® का रावण मंदिर और आंधà¥à¤°-पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के काकिनाडा में रावण का मंदिर । इसके अतिरिकà¥à¤¤ मधà¥à¤¯-पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के ही मंडसौर में à¤à¥€ रावण का मंदिर है । यहाठके लोगों का मानना है कि यहाठरावण और मंडोदरी की शादी हà¥à¤ˆ थी । इस नाते रावण यहाठका दामाद है ।
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राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के मंडोर में रावण के मंदिर के तो पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं मिले लेकिन यहाठके दवे बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का मानना है कि वे रावण के वंशज हैं । यहाठदशहरे के दिन रावण का शà¥à¤°à¤¾à¤¦à¥à¤§ और पिंड दान दिया जाता है । लंका पर चढाई करने के लिये शà¥à¤µà¥‡à¤¤ रामेशà¥à¤µà¤°à¤® पà¥à¤² बनाये जाने से पहले शिव लिंग की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ करने वाला और à¤à¤—वान राम को विजई à¤à¤µà¥‹ का आशीरवाद देने वाला बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤®à¤£ à¤à¥€ रावण ही था ।
जहाठà¤à¥€ रावण का मंदिर है वहाठशिवालय à¤à¥€ है । कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤—वान शिव रावण के आराधà¥à¤¯ देव हैं । पूरे देश मे जहां दशहरे के दिन रावण दहन होता है वहीं यहां रावण का पूजा जाना यह सोंचने को मजबूर कर देता है कि कà¥à¤¯à¤¾ रावण वासà¥à¤¤à¤µ में गलत था......