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दिल्ली: विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन शोर शराबे और आरोप प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के पास अपनी उपलब्धियां बताने के लिए कुछ नही है, सिर्फ सरकारी घोषणाओं का गुणगान करना और पूरानी परंपरा भाजपा और आम आदमी पार्टी की बनावटी लड़ाई पहले दिन भी देखी गई। डेढ़ वर्ष में भाजपा सरकार ने आम आदमी पार्टी की अनियमितताओं की 14 सीएजी रिपोर्ट में से एक के खिलाफ भी जांच के आदेश नही दिए। भाजपा आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार को दबा रही है और आम आदमी पार्टी भाजपा के वर्तमान में हो रहे भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे हुए है।
प्रदेश कांग्रेसी कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मानसून सत्र के पहले दिन 1 अगस्त से कुछ चुनिंदा श्रेणियों की महिलाओं को 2500 रुपये मासिक लक्ष्मी योजना के पंजीकरण की शुरुआत करके व्यक्तिगत गुणगान किया, जबकि वास्तविकता में गरीब परिवारों की महिलाओं को बिना किसी राजनीतिक सपोर्ट के बिना आवेदन भरना बेहद मुश्किल हो रहा है और लक्ष्मी योजना का लाभ देने के लिए जितनी शर्ते सरकार ने लागू की है शायद ही 17 लाख महिलाओं का आंकड़ा पूरा किया जा सके।
दिल्ली सरकार का दावा है कि 6 अगस्त, 2026 तक दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए 4.25 लाख से अधिक महिलाओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि आधिकारिक पोर्टल पर 1,49,941 आवेदन ही जमा किए गए हैं। राजधानी में महिलाओं को लक्ष्मी योजना के लिए पंजीकरण करने पर तकनीकी और प्रक्रियात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार 4.25 लाख का पंजीकरण होने का दावा करके अपनी नाकामी को छिपा रही है जबकि पोर्टल पर दिए गए आंकड़े का केवल 35.2 प्रतिशत महिलाओं ने जटिल दस्तावेज, डिजिटल निरक्षरता और अनिवार्य स्थानीय प्रतिनिधि हस्ताक्षर लेकर अंतिम प्रस्तुति को सफलतापूर्वक पूरा किया है। लक्ष्मी योजना के पंजीकरण में राजनीतिक खेल हो रहा है, भाजपा दूसरे राजनीतिक दलों से जुड़ी गरीब महिलाओं की अनदेखी कर रही है और सिर्फ भाजपा समर्थक महिलाओं को ही अहमियत दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक करोड़ से अधिक महिलाएं 2500 रुपये प्रति माह के लक्ष्मी योजना के तहत आर्थिक अनुदान की हकदार हैं, लेकिन रेखा गुप्ता सरकार ने इसकी पात्रता को इतना जटिल बना दिया है कि शायद ही सरकार अपने 17 लाख महिलाओं के आंकड़े को पूरा कर पाए। जिस तरह से नामांकन में शर्तों को पूरा करने में परेशानियां हो रही है उसके अनुसार उस संख्या को पूरा करना भी मुश्किल होगा। स्थानीय सांसद और विधायक के हस्ताक्षर प्राप्त करना को जरुरी बनाना पूरी तरह से अवैध और अनुचित है, क्योंकि महिलाओं को विधायकध्सांसद समय नही दे रहे और पक्षपात भी हो रहा है।