

दिल्ली: रामायण रिसर्च काउंसिल ने की रामायणी सम्मान के लिए भजन सम्राट अनुप जलोटा एवं भजन गायिका अनुराधा पौड़वाल सहित 28 विभूतियों के नामों की घोषणा । आधिकारिक रूप से प्राप्त जानकारी के अनुसार सम्मान समारोह का आयोजन गौस्वामी तुलसीदास की 529 वीं जयंती के उपलक्ष्य में अगामी 19 अगस्त को मालवीय मुल्य अनुशीलन केंद्र (बीएचयू) में होगा । आयोजकों के अनुसार उनके पास देश भर से मिलाकर 250 से भी अधिक प्रविष्टियाँ आई जिनमें से 28 का चयन हुआ । रामायणी पुरस्कार की सात श्रेणियाँ थी रामायण शोध, राम कथा वाचन, रामायण साहित्य, रामायण संगीत, बाल रामायणी, राष्ट्र सेवा रामायणी एवं श्री सीताराम पथिक ।
काउंसिल के बोर्ड ऑफ़ ट्रस्ट के अध्यक्ष अजय भट्ट जो कि नैनीताल-ऊधमपुर सिंह सीट से सांसद भी हैं, ने जानकारी देते हुए कहा कि रामायण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों का राष्ट्रीय सम्मान का उद्देश्य विभन्न रामायण परंपराओं एवं शोध कार्यों को मुख्य धारा में लाना, नई पीढ़ी को रामायण साहित्य एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ना, भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहकों का सम्मान एवं प्रोत्साहन करना तथा रामायण के माध्यम से भारतीय ज्ञान की पुण्य धारा को निरंतर प्रवाहित रखना है । वहीं साध्वी प्रज्ञा भारती का मानना है कि रामचरित मानस का लेखन गोस्वामी तुलसीदास जी ने काशी की पावन धरती पर किया और काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है जिसके कोतवाल भैरव बाबा हैं लावणी गंगा के तट पर समारोह का आयोजन गर्व की बात है ।
रामायण रिसर्च कौंसिल जहाँ एक और सीता मइया के प्रकटय क्षेत्र सीतामढ़ी में सीता मइया को भगवती स्वरूप में स्थापित कर रही है वहीं पूरे देशभर में पहली बार श्री जानकी कथा का आयोजन हो रहा है । बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने काउंसिल को सीतामढ़ी के अति प्राचीन पुनौरा धाम से 3 किलोमीटर दूर श्रीरामजानकी स्थान पर 12 एकड़ भूमि आवंटित की है । इस स्थान पर काउंसिल 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर अखंड ज्योति की स्थापना करेगी ।चतुर्भुजा महालक्ष्मी जी को भी स्थापित करेगी ।
25 अप्रैल 2026 को यहाँ के प्राचीन मैथ के जीर्णोद्धार के शिलापूजन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आये थे । 29 july 2026 को इसका जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ हो गया है । जिसमे देश विदेश के सभी सनातनियों से जुड़ने का आवाहन किया जा रहा है ताकि सीतामढ़ी में विश्व नारी शक्ति केंद्र को स्थापित कर सीता मइया के आदर्शों को स्थापित किया जा सके ।