गिरफ्तार युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पैरवी के लिए कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल उपराज्यपाल से मिला
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दिल्ली: भारत मंडपम में एआई शिखर सम्मेलन के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और आपराधिक कार्यवाही के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त करने के संबध में कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव की अगुवाई एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय माकन की मुजूदगी में उपराज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपा । कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह प्रतीकात्मक राजनीतिक प्रदर्शन था। जिसके विरोध में पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी और उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर “गंभीर चिंता“ व्यक्त की। गिरफ्तार युवाओं को किसी भी सार्वजनिक रुप में हिंसा, सम्पत्ति की क्षति या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे के किसी भी आरोप के लिए जिम्मेदार नही ठहराया गया है।
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का कहना है भाजपा लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करना चाहती है, जबकि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। भाजपा सरकार द्वारा युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करना पूरी तरह असंवैधानिक और लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा कि देश विरोधी निर्णयों के खिलाफ विपक्ष को बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के खिला विपक्ष को अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखने का अधिकार लोकतंत्र में है।
प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी दी कि माननीय उपराज्यपाल ने कांग्रेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को धैर्यपूर्वक सुना और मामले को समानता पूर्वक देखकर निष्पक्षता से जांच सुनिश्चित करने का वादा किया, क्योंकि युवा कांग्रेस का प्रदर्शन “प्रतीकात्मक और राजनीतिक था। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्री उदयभानू चिब को हिरासत में लेना पूरी तरह गैर कानूनी है। विपक्ष को शांति पूर्ण बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन सत्ताधारी भाजपा पूरी तरह तानाशाह की तरह काम कर रही है।
कांग्रेस के ज्ञापन में “प्रवर्तन में आनुपातिकता, लोकतांत्रिक राजनीतिक अभिव्यक्ति की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि राजनीतिक असहमति से उत्पन्न होने वाला अभियोजन/आरोप अत्यधिक उत्साही या अनावश्यक रूप से कठोर तरीके से न हो। उन्होंने कहा कि युवाओं की गिरफ्तारी पूरी तरह असवैंधानिक है। सरकार के देश विरोधी फैंसलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना राजनैतिक दलों का लोकतांत्रिक अधिकार है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस तथ्य पर भी जोर दिया कि राजनीतिक असहमति भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) और 19 (1) (बी) के सुरक्षात्मक दायरे में आती है। संवैधानिक ढ़ांचे के लिए आवश्यक है कि जहां अभिव्यंजक/प्रदर्शक प्रतीकात्मक प्रकृति का हो, वहां अपराधिक प्रक्रिया को संयम और समानता/आनुपातिकता के साथ लागू किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि चूंकि उनका कार्यालय “दिल्ली पुलिस के संबंध में संवैधानिक और प्रशासनिक निरीक्षण करता है, किसी भी तरह से जांच की स्वतंत्रता को बाधित किए बिना, युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति प्रदर्शित करने के लोकतांत्रिक अधिकार के तहत सार्वजनिक हित और संवैधानिक संतुलन को देखते हुए कानून के तहत तटस्थता और निष्पक्षता के साथ पुलिस काम करेगी तो संविधान में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
11:17 pm 24/02/2026