
दिल्ली:रंगपुरी पहाड़ी के इजरायल कैंप के लगभग 20 हजार लोगों के जल संकट के संबध में प्राथमिक तौर पर तत्काल हस्तक्षेप करने के संबध में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री, मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को पत्र लिखकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने जताई चिंता कहा कि इजरायल कैंप, रंगपुरी पहाड़ी दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड में अधिसूचित जेजे कलस्टर है, जहां आर्थिक रुप से कमजोर और वंचित वर्ग के लोग अपने दैनिक निर्वाह और अस्तित्व के लिए बेहद सीमित संसाधनों पर निर्भर है, जबकि इनकी जीविका के लिए मूलभूत सुविधाओं सहित पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना सरकार की विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार की नाकामी के कारण गरीब लोगों को पानी खरीदना पड़ रहा है जिसके लिए उन्हें 1500 रुपये तक मासिक खर्च करना पड़ रहा है। उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित संबधित विभागों के अधिकारियों के संज्ञान में लाते हुए कहा कि जब उच्च न्यायालय ने दिल्ली जल बोर्ड को इजरायल कैंप, रंगपुरी पहाड़ी के लिए 9 किली लीटर क्षमता के 15 टैंकर प्रतिदिन तैनात करने के आदेश दिए है, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड सिर्फ 6-7 टैंकर तैनात कर रहा है जो हजारों लोगों की जरुरत पूरी करने के लिए नाकाफी है।उन्होंने कहा कि गर्मी में पानी की बढ़ती जरुरत अनुसार कम से कम 30 पानी के टैंकर प्रतिदिन उपलब्ध कराकर इनकी प्यास बुझाई जा सकती है। इजरायल कैंप में हजारों लोगों की पानी की जरुरत को पूरा करने वाली बोरवेल को भी प्रशासन द्वारा सील करना, गरीब लोगों की अजीविका को संकट में डालना है, जबकि ये 20 लोग भी दिल्ली के नागरिक है। सरकार ने स्थायी पाईप लाईन की व्यवस्था किए या पर्याप्त टैंकर की व्यवस्था किए बोरवेल को सील किया। उन्होंने कहा कि इजरायल कैंप से करीब 50-60 मीटर दूरी पर दिल्ली नगर निगम स्कूल के नजदीक दिल्ली जल बोर्ड की पाईप लाईन को कैंप तक जोड़ा जा सकता है, तब तक कम से कम 10 सार्वजनिक नल लगाने की व्यवस्था की जाए ताकि 40-43 डिग्री की भीष्ण गर्मी में लोगों को राहत दी जा सके।
पत्र में हवाला दिया है कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, जिसको सर्वोच्च न्यायालय अपने आदेशों में बार-बार दोहराता रहा है। यही नही 1977 में संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के दौरान प्रस्ताव पारित हुआ कि स्वच्छ जल का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है और जुलाई 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव में मानव के लिए पानी अधिकार को स्वीकृति मिली। इसके अलावा राष्ट्रीय जल नीति 2012 में स्पष्ट प्रावधान किया गया कि केन्द्र, राज्यों और स्थानीय निकायों को अपने सभी नागरिकों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए पीने योग्य पानी की न्यूनतम मात्रा तक पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए।