नई दिल्ली 22, Sep 2026

लेख

1 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

2 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

3 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

4 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

5 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

6 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

7 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

8 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

9 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

10 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

11 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

12 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

13 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

14 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

15 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

16 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

17 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

18 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

19 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

20 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

21 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

22 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

23 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

24 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

25 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

26 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

27 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

28 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

29 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

30 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

31 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

32 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

33 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

34 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

35 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

36 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

37 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

38 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

39 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

40 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

41 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

42 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

43 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

44 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

45 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

46 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

47 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

48 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

49 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

50 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

असम में कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर हमला विपक्ष के नेताओं को डराने-धमकाने की साजिश

असम के नौगांव लोकसभा उपचुनाव में प्रचार के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के काफिले पर जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं नें कहा  कि भाजपा हार के डर से विपक्षी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को डराने-धमकाने की सुनियोजित कोशिश कर रही है। पार्टी ने विपक्षी नेताओं के साथ लगातार देशभर में हो रही ऐसी हिंसक घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

बता दें कि सोमवार को नौगांव के समागुरी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नकाबपोश हमलावरों ने जानलेवा हमला किया था। इन हमलावरों ने पहले काले झंडे दिखाए, फिर पथराव किया और हॉकी स्टिक, क्रिकेट बैट तथा लोहे की छड़ों से हमला किया। काफिले में पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल, गौरव गोगोई, धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन, विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजिद अली चौधरी, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर, प्रत्याशी सिबामोनी मोरा और कई विधायक शामिल थे। कुछ कांग्रेस नेताओं की गाड़ियों पर एसिड भी फेंका गया था। इस दौरान पत्रकारों पर भी हमला किया गया, ताकि घटना की रिपोर्टिंग न हो। हमले के विरोध में पत्रकारों को दो घंटे तक सड़क पर धरना देना पड़ा। पार्टी नेता मनोज चौहान की पसलियों में चोट आई और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। 
 
इस हमले को लेकर कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के जम्मू-कश्मीर के प्रभारी महासचिव एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नासीर हुसैन ने चुनाव आयोग से मांग की कि संबंधित डीसी और एसपी से रिपोर्ट तलब की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला और निलंबन हो। मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने साथ ही एफआईआर और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा चुनाव तक प्रत्याशियों, विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। 
 
डॉ. नासीर हुसैन ने कहा कि जब भाजपा को चुनाव में हार का डर सताता है, तब वह हिंसा का सहारा लेती है। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को वोट चोरी का एक रूप बताते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले इसी तरह की धमकियों के मद्देनजर हमले की आशंका को लेकर पार्टी नेताओं ने पुलिस और चुनाव आयोग को शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
 
डॉ. नासीर हुसैन ने जोर देकर कहा कि यह केवल कांग्रेस नेताओं पर हमला नहीं, बल्कि मतदाताओं को भी डराने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले भी हुआ है और यह विपक्ष के नेतृत्व पर हमला करने का एक पैटर्न है। ऐसी घटनाओं के बाद डर से लोग वोट डालने बाहर नहीं निकलते और वोटिंग प्रतिशत गिरता है, जिसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिलता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित कर रहा है और पूछा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा पहले से हमले की आशंका जताने के बावजूद भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया? मौके पर मौजूद केंद्रीय एजेंसियां हमलावरों को रोकने की बजाए पत्रकारों पर हमला क्यों कर रही थीं? चुनाव आयोग ने मामले में अब तक किसी के ऊपर कार्रवाई की है या नहीं? विपक्षी नेताओं को छोटी सी बात पर भी नोटिस भेज दिया जाता है, लेकिन दंगाइयों के खिलाफ चुनाव आयोग कोई कार्रवाई क्यों नहीं करता? 
 
कांग्रेस महासचिव ने विपक्षी नेताओं पर हुए पिछले हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी 2024 में 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान असम में राहुल गांधी और जयराम रमेश के वाहनों पर हमला हुआ था। 13 नवंबर 2024 को समागुरी उपचुनाव और 20 फरवरी 2025 को रुपाहीहाट में रकीबुल हुसैन के काफिले पर हमला हुआ था। 30 मार्च 2026 को नादुआर में कांग्रेस प्रत्याशी सुनील कुमार छेत्री पर हमला हुआ था, जिसमें वे घायल भी हुए थे। डॉ. हुसैन ने कहा कि सिर्फ असम ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी 18 सितंबर 2026 को सांसद लक्ष्मीकांत निषाद और पश्चिम बंगाल में महुआ मोइत्रा पर हमला हुआ। त्रिपुरा में साल दर साल कांग्रेस नेताओं पर हमले हुए हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को नामांकन वापस लेना पड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पुराने केस में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने नकाबपोश हमलावरों के जेएनयू, शाहीन बाग और उत्तर-पूर्वी दिल्ली की घटनाओं में शामिल होने का उल्लेख भी किया।

08:00 pm 22/09/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

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समाचार

1 - असम में कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर हमला विपक्ष के नेताओं को डराने-धमकाने की साजिश

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18 - एनएसयूआई वर्ग विशेष की नीति को खत्म करके विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक माहौल को बनाने के लिए काम करेगी

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33 - AI से फिल्म बनाना अब होगा आसान