नई दिल्ली 02, Nov 2026

लेख

1 - नाना पाटेकर हुए दुनिया से अलविदा

2 - बकरा मंडी भायखला में पुष्प वर्षा कर हुआ लाल बाग चा राजा का स्वागत

3 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

4 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

5 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

6 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

7 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

8 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

9 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

10 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

11 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

12 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

13 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

14 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

15 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

16 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

17 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

18 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

19 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

20 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

21 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

22 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

23 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

24 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

25 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

26 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

27 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

28 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

29 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

30 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

31 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

32 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

33 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

34 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

35 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

36 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

37 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

38 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

39 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

40 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

41 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

42 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

43 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

44 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

45 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

46 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

47 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

48 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

49 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

50 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

1984 सिखों कत्लेआम के शहीदों की याद में दिल्ली के बीचों-बीच म्यूजियम बनाने की मांग

 

दिल्ली: 1984 के सिखों के कत्लेआम के पीड़ित को इंसाफ दिलाने की लड़ाई पिछले 42 वर्ष से लगातार जारी है। इसी संघर्ष की एक मजबूत आवाज हैं अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल, जो हर साल अपने साथियों के साथ गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में अरदास कर क़त्लेआम में शहीद हुए  निर्दोष सिखों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । इसके बाद देश के प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौपकर पीड़ित परिवारों  को इंसाफ दिलाने एवं उनकी मांग को सरकार तक पहुचाने का प्रयास  करते  हैं ।

लेकन इस बार दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि कार्यक्रम और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौपनी की अनुमित नहीं दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया। इस पर कड़ा एतराज जताते हुए जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाये और इसे दंगा पीड़ितों  के साथ सौतेला व्यवहार करार दिया । जत्थेदार भोगल ने सवाल किया कि जब अन्य लोगों और संगठन को अपनी बात रखने तथा ज्ञापन सौपने की  अनुमित दी जा सकती है, तो 1984 के दंगा पीड़ितों के साथ ऐसा भेदभाव क्यूँ किया जा रहा है? उन्होंने  कहा कि उनकी ओर से केवल दो व्यक्तियों के साथ प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौपने की अनुमित मांगी गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी भी मंजूरी नहीं दी। आखिर दंगा पीड़ितों को आवाज उठाने से रोकने की वजह क्या है?

उन्होंने दो टूक कहा कि 1984 के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का उनका संघष कोई राजनीतिक गितिविधि नहीं, बल्कि उन परिवारों के दर्द और अधिकार की लड़ाई है, जिन्होंने अपने अपन को खोया और चार दशक से अधिक समय बीत जाने के

बावजूद न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं । उन्होंने संकल्प दोहराया कि उनकी यह लड़ाई आखरी सांस तक जारी रहेगी और पीड़ितों  को इंसाफ दिलाकर ही दम लेंगे । जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रधानमंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री और संबंधित सरकारी विभाग  से लगातार अपील की है कि दिल्ली के केंद्रीय क्षेत्र में 1984 के सिख  कत्लेआम  में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में एक स्मारक और म्यूजियम बनाया जाए। उनका कहना है कि दिल्ली में ऐसा ऐतिहासिक स्मारक होना चाहिए , जहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक 1984 में  सिख  समुदाय के साथ हुई भयावह त्रासदी और उस दौर के इतिहास  से परिचित हो सकें ।

उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम केवल शहीद की याद को संजोने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों  को इतिहास की सच्चाई से रूबरू कराने और ऐसी त्रासदी दोबारा न होने का संदेश देने का भी काम करेगा। 42 साल बीत गए, लेकिन इंसाफ की आस आज भी बाकी है। जत्थेदार कुलदीप सिंह  भोगल का कहना है कि जब तक 1984

के परिवारों  को न्याय नहीं मिलता और शहीद को उनका उिचत संमान नहीं दिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा ।

03:50 pm 02/11/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

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समाचार

1 - 1984 सिखों कत्लेआम के शहीदों की याद में दिल्ली के बीचों-बीच म्यूजियम बनाने की मांग

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3 - द कंपोज़र बनी बेस्ट फिल्म, जल्द ही बीजिंग में सजेगा इंडियन फिल्म फेस्टिवल का मंच

4 - वोट चोरी के खिलाफ इंडिया गठबंधन की महारैली में उमड़ा जनसैलाब

5 - 1984 में जो हुआ वह सिर्फ एक दंगा नहीं था बल्कि एक तरह का नरसंहार था

6 - बेगम अख्तर की 52वीं पुण्यतिथि पर संगीत और सिनेमा का संगम

7 - गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर पाकिस्तान जाने वाली हर संगत को बिना रुकावट वीजा

8 - छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवगाथा को बड़े पर्दे पर लाएंगे भूषण कुमार

9 - घर बैठे शराब बुक करें ऐप के मामले में खुद ही एलबीडब्ल्यू हो गए

10 - मनजीत सिंह जीके के खिलाफ दर्ज मामलों में अदालती कार्रवाई तेज

11 - 30-31 अक्टूबर को होने वाले चाइना फ़िल्म फेस्टिवल में होगा चीनी भाषा की 11 फिल्मों का प्रदर्शन

12 - ‘सृष्टि दी चादर’ समारोह में विभिन्न धर्मों के नेता एकजुट हुए

13 - गुरु नानक विश्वविद्यालय(ननकाना साहिब) के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में परमजीत सिंह सरना हुए शामिल

14 - अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुका रही है आम जनता

15 - खड़गे के आवास पर प्रदर्शन के दौरान हर्ष मल्होत्रा, राजेश भाटिया, मोहनलाल गिहारा सहित 200 कार्यकर्ता हुए डिटेन

16 - ‘अवेकनिंग’ स्वामी चिन्मयानंद पर बनी एक संगीतमय जीवनी

17 - 36 घंटे से बत्ती गुल होने पानी के लिए तरस रहे लोग सड़कों पर

18 - ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-1 लागू होने के बावजूद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में

19 - पहला मुख्यमंत्री जिसपर कस्टम नियम 1962 के अंतर्गत रूपए 50 हजार का जुर्माना

20 - ‘दूसरा’ को लेकर सौरव गांगुली को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका

21 - दलीप सिंह पेरिस में भुलाए गए, मान फ्रांस में बजा रहे बांसुरी

22 - 1947 में देश आजाद हुआ पर क्या आजादी के साथ ही भारत का भरतीयकरण हो गया

23 - उप राष्ट्रपति ने किया बाण चलाकर बुराई के प्रतीक रावण का दहन

24 - रावण देगा दिल्ली वालों को तीन संदेश करो अहंकार, ट्रैफिक और प्रदूषण को खत्म

25 - त्यौहारों के सीजन में दिल्ली की सड़कों को खुदाई और अतिक्रमण से हों मुक्त

26 - राजस्थान के देशनोक, बीकानेर और जोधपुर में होगी कर्णिका की शूटिंग

27 - 250 फीट की ऊंचाई पर आकाश मार्ग से जब श्री राम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर उठाए हनुमान जी

28 - यदि पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की सरकार बनती है तो बंदी सिंहों की रिहाई उसकी पहली प्राथमिकता होगी

29 - चिट्टा पार्टी के साथ मिलकर पंजाब में फिर नशा बेचने का सपना

30 - ‘रिजीम चेंज’ (तख्तापलट) और अराजकता के जरिए सत्ता

31 - अल्बर्ट पिंटो याने कि प्रधानमंत्री को गुस्सा क्यूँ आता है

32 - केवट बने मनोज तिवारी, मुस्कुराये बिना नहीं रह सके नितिन नवीन

33 - युवाओं को गुमराह कर सत्ता परिवर्तन का सपना