नई दिल्ली 14, Mar 2026

लेख

1 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

2 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

3 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

4 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

5 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

6 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

7 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

8 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

9 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

10 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

11 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

12 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

13 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

14 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

15 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

16 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

17 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

18 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

19 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

20 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

21 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

22 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

23 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

24 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

25 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

26 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

27 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

28 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

29 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

30 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

31 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

32 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

33 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

34 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

35 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

36 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

37 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

38 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

39 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

40 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

41 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

42 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

43 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

44 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

45 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

46 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

47 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

48 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

49 - मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुए पंचतत्वों विलीन

50 - दिल्ली में यमुना का पानी का बीओडी लेवेल 50 के पार

सोनम वांगचुक को बिना सबूत जेल में रखा: केजरीवाल

दिल्ली: फर्जी शराब घोटाले की साजिश रचने के मामले में एक्पोज होने के बाद अब प्रख्यात जलवायु वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी मामले में भी मोदी सरकार की एक और पोल खुल गई है। सोनम वांगचुक मामले में लगातार कोर्ट में एक्पोज हो रही मोदी सरकार ने अपनी और किरकिरी से बचने के लिए उनकी एनएसए के तहत हिरासत को रद्द कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पीएम मोदी पर तीख हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने इसे तानाशाही का चरम बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गई है। एक वैज्ञानिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया था। उनको बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जेल में बिताए उनके महीने न केवल उनके लिए व्यक्तिगत क्षति थे, बल्कि राष्ट्र के लिए भी क्षति थे। इस घोर तानाशाही का जनता के बीच पर्दाफाश होना चाहिए और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह दिल्ली में फर्जी शराब घोटाले का षड़यंत्र रचकर आम आदमी पार्टी की टॉप लीडरशिप को महीनों जेल में रखा गया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता भारद्वाज ने कहा कि आज से करीब 6 महीने यानी करीब 170 दिन पहले लद्दाख के एक बहुत मशहूर वैज्ञानिक को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत यह कहकर गिरफ्तार कर लिया था कि वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने लद्दाख और भारतीय सेना के लिए अनगिनत आविष्कार किए हैं और गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। महीनों से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था और केंद्र सरकार अलग-अलग बहाने बनाकर इस मामले में बस तारीखें लेती जा रही थी। जब सोनम वांगचुक को इस तरह से गिरफ्तार करके हिरासत में लिया गया था, तब तमाम मीडिया ने झूठी खबरें चलाई थीं कि सोनम वांगचुक को न जाने कहां-कहां से अवैध पैसा मिल रहा है और वे देश के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट में सबूत रखने का समय आया, तो सरकार के पास ले-देकर कुछ वीडियो ही थे। बाद में पता चला कि उन वीडियो को भी अदालत में गलत तरीके से पेश करके एक झूठा मुकदमा बनाया जा रहा था।
हैबियस कॉर्पस एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी उपाय है, जिसे 12वीं शताब्दी के इंग्लैंड के मैग्ना कार्टा और कुछ न्यायिक सिद्धांतों से लिया गया है। इसके तहत अगर सरकार या सत्ता में बैठे लोग नागरिकों को गलत तरीके से जेल में डाल दें, तो उसके खिलाफ यह बचाव का एक रास्ता होता है। किसी भी लोकतंत्र के लिए यह अधिकार अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है और ऐसी याचिका पर छह महीने तक केस चलना भी अपने आप में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बात से साफ हो जाता है कि केंद्र सरकार के पास सोनम वांगचुक के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और आज नहीं तो कल सुप्रीम कोर्ट उन्हें रिहा कर ही देती। इसी फजीहत और शर्मिंदगी से बचने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अगली तारीख से पहले ही सोनम वांगचुक के खिलाफ जारी किया गया अपना हिरासत का आदेश वापस ले लिया।
 सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इस तरह से किसी को भी पकड़कर जेल में डाल सकती है? क्या किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन या जायज संवैधानिक मांग को दबाने के लिए किसी को भी जेल में डाला जा सकता है? क्या केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के वे 170 दिन वापस कर पाएगी? क्या जहर फैलाने वाला वह मीडिया और सोनम वांगचुक के खिलाफ झूठ फैलाने वाले वे चैनल, जिन्होंने उन्हें जनता के सामने एक देशद्रोही की तरह पेश किया, अब उनसे माफी मांगेंगे? आज लोकतंत्र के सामने यह बहुत बड़े सवाल हैं। 
उन्होंने तमाम विपक्षी दलों से यह निवेदन किया कि वे सब सोनम वांगचुक के साथ खड़े हों और उनकी आवाज उठाएं। आज यह सोनम वांगचुक के साथ हुआ है, कल को यह किसी के साथ भी हो सकता है। जो भी व्यक्ति देश के लोगों की आवाज उठाने की कोशिश करेगा, सरकार उसे इसी तरह से झूठे मुकदमों में जेल में डाल सकती है। यह ठीक वैसे ही है जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं को भी आबकारी के एक झूठे मामले में महीनों तक जेल में डाला गया था।

05:03 pm 14/03/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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समाचार

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21 - अगर यह शराब नीति सही थी तो इसको वापस क्यों लिया गया

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25 - गिरफ्तार युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पैरवी के लिए कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल उपराज्यपाल से मिला

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