चेयरमैन की मंजूरी के बिना नहीं टाली जा सकती चुनाव की तारीख
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दिल्ली: 29 मई को नामांकन और 3 जून को होने वाले वार्ड कमिटी चुनाव को बिना तय प्रक्रिया अपनाए अगले आदेश तक टाल दिया गया। डीएमसी एक्ट की धारा 53(2) साफ कहती है कि चेयरमैन की मंजूरी के बिना न चुनाव की तारीख तय हो सकती है और न ही टाली जा सकती है। एमसीडी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने निशाना साधते हुए कहा कि आखिर किसके इशारे पर निगम सचिव ने लिया ये फैसला। भाजपा की चार इंजन सरकार में अंदरूनी लड़ाई, चेयरमैनी की बंदरबांट और खरीद-फरोख्त चरम पर है। एक तरफ भाजपा में जोन चेयरमैन के पद बिक रहे हैं तो दूसरी तरफ उसे कई जोन गंवाने का डर सता रहा है। भाजपा को डर है कि उनके अपने पार्षदों की नाराज़गी से ज़ोन उनके हाथ से निकल सकते हैं। भाजपा सत्ता के लालच में लगातार लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आज निगम सचिव के माध्यम से एक चिट्ठी आई है, जिसमें 3 जून को होने वाले वॉर्ड कमेटी के चुनाव को अगले आदेश तक टाल दिया गया है। इन चुनावों के लिए 29 मई को नामांकन होना था। डीएमसी एक्ट का सेक्शन 53(2) साफ दर्शाता है कि वॉर्ड कमेटी के किसी भी चुनाव की तारीख बिना चेयरमैन की मंजूरी के न तो तय हो सकती है और न ही टाली जा सकती है। सोचने वाली बात है कि फिर निगम सचिव ने आखिरकार यह चुनाव कैसे टाल दिया? दिल्ली में भाजपा की चार इंजन वाली सरकार है और एमसीडी में भी भाजपा है। भाजपा के अंदर वॉर्ड कमेटी और चेयरमैन के चुनाव को लेकर निगम पार्षदों में भारी आक्रोश है और आपस में लड़ाइयां हो रही हैं। भाजपा चेयरमैनी बेच रही है, जिसकी वजह से उनके पुराने पार्षद खासे परेशान और आक्रोशित हैं। चार जोन आम आदमी पार्टी और आठ जोन भाजपा के पास हैं। पार्षदों की इसी नाराजगी और चेयरमैनी बिकने के कारण भाजपा को यह डर सता रहा है कि कहीं उनके आठ जोन भी उनके हाथ से न निकल जाएं और कुछ अन्य जोन आम आदमी पार्टी के पास न चले जाएं।
शर्म आनी चाहिए कि निगम सचिव के कंधे का इस्तेमाल करके ऐसे तुगलकी फरमान निकाल जा रहे है। चुनाव की जो प्रक्रिया होनी चाहिए, उसका पालन किए बिना और चार चेयरमैन के हस्ताक्षर लिए बिना ही इसे आगे के लिए टाल दिया गया और अगली तिथि भी तय नहीं की गई। यह तीसरी बार है जब भाजपा अपने डर की वजह से चुनावों से भाग रही है, ताकि उनके जोन उनके हाथ से न निकल जाएं। भाजपा को शर्म करनी चाहिए। चुनाव की अगली तारीख तय न करने का साफ कारण यही है कि भाजपा के अंदर भारी दिक्कत और आक्रोश है, तथा चेयरमैन की सीटों की बिक्री चालू है।
भाजपा के पार्षद खुद ही अपनी पार्टी का विरोध कर रहे हैं। पार्टी के अंदर बहुत ज्यादा विरोध चल रहा है और इसी डर से भाजपा जोन चुनाव को बार-बार टाल रही है। चेयरमैन के पद बिक रहे हैं, उनके रेट सेट हो रहे हैं और रोज बोलियां लग रही हैं। दूसरी तरफ, पार्षद इतने ज्यादा आक्रोश में हैं कि भाजपा को डर लग रहा है कि काफी जोन उनके हाथ से निकल जाएंगे। यह तीसरी बार है जब इन्होंने चुनाव टाला है। जोन का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। 1 अप्रैल के बाद वॉर्ड कमेटी तभी काम कर पाती है जब नया चेयरमैन आता है। अप्रैल और मई का पूरा महीना निकल चुका है और अभी तक इन्होंने चुनाव की अगली तारीख तय नहीं की है।
02:52 pm 28/05/2026