
दिल्ली: हाईकोर्ट में कर्मचारियों की बकाया राशि कीं कोर्ट की निगरानी में पेमेंट शेड्यूलिंग के लिए दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा गत 7 जुलाई को गुरुद्वारे की भूमि को रेहन पर रखे जाने पर राजीनामा दिए जाने पर शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष प्रमजीत सिंह सरना ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रबंधन के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका एवं दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा पर निशाना साधते हुए दे डाली चंपत राय की संज्ञा कहा कि संगत का खजाना खाली एवं गुरुद्वारे की संपत्ति कोर्ट में रहन पर रखने की तैयारी है ।
उन्होंने रेहन पर रखी गई ज़मीन का ब्यौरा देते हुए बताया कि 10 एकड़ ज़मीन शाहदरा में है एवं 300 एकड़ ज़मीन बिघर हरियाणा में है । इनमें से एक ज़मीन पंथक के लिए ऐतिहासिक है क्यूँकि वहाँ पर बाबा हरबंस सिंह का अंतिम संस्कार हुआ था । अपने कार्यकाल की तुलना करते हुए सरना ने जोर देकर कहा कि जब उन्होंने पद छोड़ा था तब प्रबंधन के पास 125 क़रोड़ रुपये का सरप्लस फण्ड था लेकिन कुप्रबंधन के कारण आज नौबत आ गई है देनदारियों को चुकाने के लिए ज़मीन रेहन पर रखनी पड़ रही है ।
उनका आरोप है कि मौजूदा प्रबंधन जानबूझकर डॉलाइट ऑडिट रिपोर्ट को पंथक से छिपा रहा है ।यदि कुछ झोल झाल नहीं है तो रिपोर्ट को पब्लिक डोमेन में क्यूँ नहीं सार्वजनिक किया जा रहा है । समय समय पर हलफ़नामों के ज़रिए नियमों के पालन पर नजर रखने का हाई कोर्ट का फ़ैसला वित्तीय स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है एवं प्रबंधन के कामकाज में पारदर्शिता पर बल देता है । हाल ही में प्रबंधन द्वारा एक प्रेसवार्ता में कालका काहिलो की दावेदारी की 90 फीसदी स्टाफ उनके पास है पर पलटवार करते हुए जागो पार्टी से मनजीत सिंह जीके ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या स्टाफ ने केस वापस ले लिया है ? किश्तों में स्टाफ की बकाया राशि का भुगतान 2034 तक पूरा होना है ।
पंथक के दोनों ही नेताओं का मानना है कि आज देनदारी के 600 क़रोड़ की है जो 2034 में 12-13 सौ करोड़ के लगभग हो जाएगी ।