
दिल्ली: सदन के पटल में रखे गए एमसीडी के आगामी वित्तीय वर्ष के बजट को एमसीडी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने महज कागजी करार देते हुए कहा कि यह बजट जन सरोकारों से कोसों दूर और दिखावटी है। ये बजट कूड़े के पहाड़, साफ सफाई, एमटीएस कर्मियों, आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं देता है। उन्होंने कहा कि एमसीडी चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कई बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन बजट में एक भी वादा पूरा नहीं किया। यह जनता का बजट नहीं है, बल्कि एक कागजी बजट है जो कॉमेडी शो जैसा लग रहा था। नेता सदन द्वारा रखा गया आज का बजट भाजपा की विफलताओं को दर्शाता है। यह एक हास्यास्पद बजट था जो जनता की प्राथमिकताओं से कोसों दूर है। जहां जनता की प्राथमिकता लैंडफिल साइट को हटाना है, वहां लैंडफिल साइट के ऊपर इनके ठोस कदम नहीं दिखाई दे रहे। जहां जनता की प्राथमिकता साफ-सफाई है, वहां सफाई पर इनकी कोई योजना नहीं दिख रही। बागवानी, पार्कों के अंदर सफाई, पार्कों के लिए नए माली और पेड़ों की छंटाई जैसी प्राथमिकताओं पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।एमटीएस कर्मचारियों से बढ़ी हुई तनख्वाह देने के जो वादे किए गए थे, वे बिल्कुल खराब निकले और पूरे नहीं हुए। वे कर्मचारी 30-30 दिन हड़ताल पर बैठे रहे और उनका अपमान हुआ। उन्हें आश्वासन दिया गया लेकिन वादा पूरा नहीं किया गया। इसके साथ ही बाकी एमटीएस कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए कोई प्रावधान नहीं लाया गया। भाजपा के लोग खुद को चार इंजन की सरकार कहते हैं, लेकिन कोई खास बजट नहीं ला पा रहे हैं। आवारा कुत्तों की समस्या भयंकर है, लेकिन इस बजट में हर वार्ड के अंदर शेल्टर होम बनाने की कोई बातचीत नहीं है और नसबंदी के बाद भी समस्या जस की तस है। सफाई कर्मचारियों को पक्का करने और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए कोई उचित प्रावधान नहीं है ताकि वे और बेहतर काम कर सकें और दिल्ली की सड़कों को पूरी तरह साफ कर सकें।