नई दिल्ली 17, Oct 2021

लेख

1 - महंत नरेंद्र गिरी की मौत पर लगे सवालिया निशान

2 - अकाली दल बादल ने लगाई हैट्रिक

3 - सबके साथ,सबके विकास,सबके विश्वास एवं सबके प्रयास से ही लक्ष्य प्राप्ति संभव

4 - जबरन कराया गया बच्ची का अंतिम संस्कार

5 - सिने जगत के ट्रेज्डी किंग को देश का आखरी सलाम

6 - कोरोना से जंग मे योग ही एक आशा की किरण

7 - संक्रमण काल का मंत्र फिट रहें दुरूस्त रहें

8 - एक बार फिर लहराया पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का परचम

9 - हिंसा एवं टकराव की बिसात पर बंगाल की राजनीति

10 - ट्रेक्टर रैली के नाम पर बलवाइयों का तांडव

11 - 72 वें गणतंत्र दिवस का आकर्षण राम मंदिर की झांकी

12 - किसान आंदोलन का रूख कहीं पंजाब में संभावित चुनाव तो नहीं

13 - बिहार में फिर एक बार यूपीए का परचम

14 - बिहार में इस बार का चुनावी मुद्दा है विकास

15 - जातिगत एवं सांप्रदायिक एंगल से चमकती राजनीति

16 - हाथरस मामले में तुष्टिकरण की राजनीति

17 - गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ

18 - बालीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या या आत्महत्या

19 - आत्मनिर्भर भारत देश के लिये महामंत्र

20 - भूमि पूजन के साथ शुरू हुई राम लला के गृह निर्माण की तैयारी

21 - उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत पर छाया प्राकृति का प्रकोप

22 - साइबर वार ने लिया खतरनाक मोड़

23 - सीमा तनाव के पीछे चीन की दोहरी मानसिक्ता

24 - कोरोना संक्रमण काल में भी सक्रिय है पासों की बिसात पर राजनीति

25 - अनानास मे विस्फोटक पदार्थ डालकर हाथी की हत्या

26 - उड़ीसा एवं वेस्ट बंगाल में तबाही का मंजर

27 - जारी है प्रवासी मजदूरों का भारी संख्या में पलायन

28 - कश्मीर में आज भी सक्रिय जहिादी गतिविधियाँ

29 - परस्पर सदभाव संवाद एवं शांति से होगी कोविड 19 पर विजय

30 - पालघर हत्याकांड की सीबीआई जाँच की माँग

31 - समरथ को नहीं दोष गोसाई

32 - जिला एवं तहसील स्तर पर प्रकाशनों की दुर्दशा का भी जरूरी है संज्ञान

33 - आगामी सप्ताह सख्ति से होगा लाक डाउन के नियमों का अनुपालन

34 - ध्यान एवं शारिरिक क्रियाओं के माध्यम से फिट रहिये स्वस्थ्य रहिये

35 - कोविद 19 से निपटने का महामंत्र संयम और संकल्प

36 - मध्य प्रदेश में बढ़ी कांग्रेस की सिरदर्दी

37 - कुछ इस अंदाज में मिले ट्रंप और मोदी

38 - झाड़ू ने किया हाथ और कमल का सफाया

39 - वायदों की बिसात पर दिल्ली की राजनीति

40 - 71 वें गंतंत्र दिवस परेड का आकर्षण सीआरपीएफ का मोटर सवार महिला दस्ता

41 - साधना एवं व्यायाम पर आधारित फालुन दाफा

42 - नागरिक्ता संशोधन कानून पर हो रही है वोट बेंक की राजनीति

43 - एनआरसी के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति

44 - झारखंड में समय की कसौटी पर है चाणक्य का चक्रव्युह

45 - चोसर की बिसात पर है महाराष्ट्र की सियासत

46 - राम लला को मिला उनका मालिकाना हक

47 - माकूल इंतेजामात के साथ मनाया जा रहा है छट महोत्सव

48 - दीपावली की हार्दिक शुभेच्छा

49 - एक बार फिर कमल खिला हरियाणा और महाराष्ट्र में

50 - इंसाफ की तलाश में भटक रहे हैं पीएमसी बैंक के खाताधारी

महंत नरेंद्र गिरी की मौत पर लगे सवालिया निशान

12 पन्नों के सोसाइड नोट ने लगाया अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत पर सवालिया निशान । जानकारों के अनुसार महंत को पढ़ना-लिखना नहीं आता था । दूसरों से खत लिखवाकर बमुश्किल हस्ताक्षर किया करते थे । आखिर ऐसे कौन से राज हैं जिनके खुलने के डर से दबाव में आकर महंत ने किये होंगे 12 पन्ने के सोसाइड नोट पर हस्ताक्षर ? कौन है पर्दे के पीछे का खलनायक ? क्या चेलों की बेवफाई के चलते  हुई महंत की मौत ? जेहन में ऐसे कई बहुत से सवाल  हैं जिनका खुलासा होना अभी बाकी है ।


प्रयागराज के अल्लापुरा स्थित श्रीमठ बाघंबरी गद्दी के जिस कमरे मे पंखे पर लटककर महंत ने कठित आत्महत्या की थी, उसका पंखा चल रहा था एवं जमीन पर रखे महंत के पार्थिव शरीर के साथ उनके उनके शिष्य बलबीर गिरी खड़े थे । शव को पुलिस के आने से पहले क्यों उतारा गया ? जहाँ सोसाइड नोट में महंत ने बालवीर को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है वहीं प्रमुख शिष्य आनंद गिरी जो कि उनके कथित उत्तराधिकारी भी हैं एवं अन्य सहयोगियों पर आत्महत्या करने के लिये मजबूर करने का आरोप लगाया गया है ।

घटनाक्रम के दौरान आनंद गिरी हरिद्वार में थे । उन्हें हरिद्वार से प्रयागराज लाया गया है और फिलहाल हिरासत में हैं । उनके खिलाफ जार्ज टाउन थाने मे भारतीय दंड विधान की धारा 306 के तहत मामला दर्ज  है । महंत नरेंद्र गिरी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के साथ निरंजनी अखाड़े के सचिव भी थे । ममले पर तहकीकात जारी है पुलिस ने कुछएक करीबी लोगों को हिरासत में लिया है एवं जवाब-तलब जारी है ।

 संदेहजनक परिस्थितियों में हुई महंत नरेंद्र गिरी की मौत के मध्य-नजर दिल यह सोचने को मजबूर हो जाता है कि मोह-माया को त्यागकर सन्यासी बने साधू-संत भी नहीं हैं राजनीति से अछूते.....  
 

अकाली दल बादल ने लगाई हैट्रिक

एक बार फिर दिल्ली सिख गुरूद्वारा कमेटी के चुनाव में एक बार फिर तीसरी बार  अकाली दल बादल ने लगाई हेडट्रिक ।  यह बात और है कि वर्तमान अध्यक्ष सरदार मनजिंदर सिंह सरना खुद अपना चुनाव हरविंदर सिंह सरना से 500 वोटों से हार गये  हैं ।


दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी दिल्ली की सबसे बड़ी धार्मिक प्रबंधन कमेटी है जिसके जिम्मे दिल्ली के गुरूद्वारों के साथ प्रबंधन के आधीन चल रहे शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों की व्यवस्था है । यह संस्था सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय है एवं आपदा प्रबंधन में सियासतदानों की मदद करती है ।


इस बार की मतदान दर 37 फीसदी रही जो पिछली दफा से 8.61 फीसदी कम रही । 3.42 लाख सिख मतदाताओं में से केवल 1.27 लाख ने मतदान किया । सरदार मनजिंदर सिंह सरना एवं शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रधान सरदार सुखबीर सिंह बादल ने इस जीत को संगत की जीत बताया है । सिरसा को दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी ने अपना सदस्य मनोनीत किया है । सिरसा एक बार फिर से बने प्रबंधन के अध्यक्ष ।

सबके साथ,सबके विकास,सबके विश्वास एवं सबके प्रयास से ही लक्ष्य प्राप्ति संभव

लाल किले पर घ्वजारोहन के बाद अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिनवाते हुए प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने लक्ष्य प्राप्ति के लिये  दिया सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास एवं सबके प्रयास पर बल  ।

इस बार दिल्ली पुलिस के 6 अधिकारी एवं कर्मी वीरता के लिये हुए राष्ट्रपति पुलिस पदक से संमानित । इनके  नाम हैं  पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा, सहायक पुलिस आयुक्त अनुज कुमार,शहीद हेड कांस्टेबल रतन लाल, कांस्टेबल प्रदीप शर्मा, कांस्टेबल मोहित कुमार एवं कांस्टेबल नवीन । इनके अतिरिक्त 16 पुलिस कर्मी एवं अधिकारियों को विशिष्ठ एवं सहराहनीय कार्यो के लिये पुलिस पदक से संमानित किया गया ।

माकूल सुरक्षा इंतेजामात एवं कोविड दिशा निर्देशें का अनुपालन करते हुए देश भर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है 75 वाँ जश्न-ए-आजादी । सियासतदानों ने लाल किले पर तो आम नागरिकों  ने घर ही टेलीविजन में सीधा प्रसारण देखकर एवं बच्चों एवं युवाओं ने छत पर पतंग उड़ाकर मना रहे हैं 75 वाँ जश्न-ए-आजादी ......
 

जबरन कराया गया बच्ची का अंतिम संस्कार

दिल्ली में 9 साल की बच्ची के सनसनीखेज हत्याकांड पर सियासतदान हैं खामोश । राजनीतिक हलकों में मची हलचल । राजधानी में महिलाओं और बालिकाओं के साथ बढ़ते अपराधिक मामलों को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने साधा दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार एवं मुख्य-मंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना । दिल्ली छावनी के ओल्ड नांगल गांव के एक दलित परिवार की  रविवार की शाम नांगल शमशान घाट में पानी लेने गई 9 वर्षीय लड़की  साल की लड़की जिसको हम गुड़िया के नाम से जान रहे हैं की वहीं के कुछ लोगों द्वारा बलात्कार के बाद बिना माता पिता की सहमति से जबरन अंतिम संस्कार  कर दिया गया ।

परिजनों की शिकायत पर 4-5 घंटे बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुँचती है और यह सार्वजनिक किया जाता है कि लड़की की मौत कंरट लगने से हुई है । मामला एस.सी/एसटी एक्ट के तहत चारों अपराधियों के खिलाफ आईपीसी की 304, 342 और 201 के तहत दर्ज होता है । राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद अपराधियों के खिलाफ  बलात्कार  एवं हत्या का मामला  दर्ज  होता है । पूर्व विधायक श्री जय किशन और वीर सिंह धींगान  केअनुसार घटना के कुछ घंटों बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और दलित लोगों ने वहां पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पहुॅच गए और घंटों पुलिस थाने में पीड़ित परिवार को बैठाने के बाद थाने से बाहर लाए और पुलिस पर दवाब डालकर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज  एवंअपराधियों को पकड़ा  अधजले शरीर को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया ।

धरने प्रदर्शन जारी हैं एवं मामले की फास्ट ट्रेक कोर्ट से जाँच एवं पीड़ित परिवार की सुरक्षा की माँग की जा रही है । यदि आंकड़ों पर गौर फरमाया जाये  तो 2014 से 15 जून 2021 तक दिल्ली में 15,501  महिलाओं के साथ बलात्कार हुए मामले दर्ज हुए हैं । कहीं ना कहीं आज भी असुरक्षित है राजधानी दिल्ली......

 

सिने जगत के ट्रेज्डी किंग को देश का आखरी सलाम

6 दशकों तक अभिनय के दम पर दर्शकों के दिल पर राज करने वाला फिल्मी सितारा हुआ दुनिया से अलविदा । जी हाँ हम चर्चा कर रहे हैं मोहम्मद युसुफ खान की जो बालीवुड में दलीप कुमार के नाम से जाने जाते हैं ।  7 जुलाई को हिंदुजा अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली । 98 साल के दलीप कुमार एक अरसे से बिमार चल रहे थे ।

पेशावर में जन्में दलीप कुमार के फिल्मी जीवन की शुरूआत 1944 में ज्वार-भाटा फिल्म से हुई । उन्होंने 60 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है । उनकी कुछ चर्चित फिल्में हैं अंदाज,मुगुल -ए- आजम,देवदास,क्रांति,कर्मा, शक्ति एवं सौदागर ।

अभिनय के क्षेत्र में नायब भूमिका निभाने के लिये उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड, दादा साहिब फालके अवार्ड एवं भारत का सर्वोच्च अवार्ड पदमश्री से नवाजा गया । सिने जगत में वह ट्रेजडी किंग एवं फस्ट खान के रूप में मशहूर थे ।

वह  2000 से 2006 तक कांग्रेस पार्टी द्वारा मनोनीत राज्य सभा के सदस्य रहे । एमपी लेड फंड से बांद्रा बेंच स्टेंड एवं बांद्रा फोर्ट के सोंदर्यकरण में महत्वपूर्ण भुमिका रही । सिने जगत के ट्रेजडी किंग को देश का अंतिम सलाम । यादों के मंजूषा से पेश है एक झलक....

कोरोना से जंग मे योग ही एक आशा की किरण

कोरोना संक्रमण के लिये निर्धारित दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देशों  में मनाया गया सातवाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस । राष्ट्रपति भवन परिसर  में राष्ट्रपति रामनाथ कोविदयोगाभ्यास करते नजर आये तो उप-राष्ट्रपति के वेंकैया नाइडू अपने आवास परिसर में अनुलोम-विलोम करते ।


बाघा बार्डर स्थित बीएसएफ एवं आईटीबीपी के जवानों द्वारा योग दिवस मनायं जाने के समाचार मिले हैं । दिल्ली पुलिस के आयुक्त श्री एस.एन.श्रीवास्तव भी अपने आवास परिसर में  धर्म-पत्नि के साथ योग-आसन करते दिखे ।


प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अपने राष्ट्र के नाम संदेश में कोरोना महामारी के संक्रमण के दौर में योग-आसान को आशा की कड़ी बताया । उन्होंने विश्व स्वस्थ्य संघठन के सहयोग से एक मोबाइल ऐपलिकेशन भी लाँच की ।


स्वस्थ्य जीवन एवं मानसिक संतुलन को बनाये रखने के लिये महर्षि पतांजली के द्वारा बताये गये योग के आठ सूत्रों -यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारण,ध्यान एवं समाधि  का अनुपालन करना जरूरी है । फिट रहेगा तभी तो जीतेगा इंडिया महामारी से......

संक्रमण काल का मंत्र फिट रहें दुरूस्त रहें

कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिये प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के साथ कहीं न कहीं जरूरी है शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखना । जरूरत पड़ने  योग्य चिक्त्सिक के परामर्श से औषधि के साथ नियमित रूप से क्षमता अनुसार शारीरिक व्यायाम द्वारा स्वसन-तंत्र को दुरस्त रखने के साथ शरीर में आक्सिजन के लेवल को बनाये रखा जा सकता है ।


सूर्य नमसकार, अनुलोम-विलोम, कपाल भारती एवं भ्रस्त प्राणायाम आदि कुछ ऐसी योग क्रियायें हैं जिनको नियमित रूप से किये जाने से मानसिक संतुलन के साथ स्वसन तंत्र एवं पाचन क्रिया दुरस्त होती हैं । भारत के ऋषि मुनियों के द्वारा योग एवं चीन के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा इजहाद की गई फालुन दाफा शारीरिक क्रियाओं के अच्च्छे परिणाम सामने आये हैं ।


योग को हरिद्वार स्थित पतांजली योग संस्थान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घर-घर पहुचाने का श्रेय जाता है योग गुरू बाबा राम देव को । आज भारत को विश्व में योग गुरू के नाम से जाना जाता है ।
बौद्ध भिक्षुओं द्वारा साधित घ्यान एवं शारिरिक क्रियाओं पर आधारित फालुन दाफा  का जन्म चीन में हुआ । 114 देशों में 10 करोड़ से भी अधिक आज इसके अनुयाई हैं । बौद्धिक विकास के साथ इस पद्धति मे शारीरिक विकास के लिये पाँच प्रकार के व्यायामों का सामावेश है । नियमित अभ्यास से साधक को बौद्धिक एवं शारीरिक विकास के साथ सत्यएकरूणा एवं सहनशीलता से आत्मसात होता है ।

 

विस्तृत जानकारी के लिये लाग आन करें:

 

www.patanjaliyogsansthan.com

www.falundafa.org www.falundafaindia.org

योगासन एवं शारीरिक क्रियाओं  का अभ्यास जाँच पड़ताल के पश्चात योग्य प्रशिक्षक के सानिध्य में ही किया जाना चाहिये...



 

एक बार फिर लहराया पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का परचम

तमाम कवायदों एवं जद्दोजहद के बावजूद भी एक बार फिर लहराया पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का परचम । बंगाली असमिता का फार्मूला आखिर काम कर ही गया । हालांकि देश की सबसे बड़ी पाटी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सारी शक्ति पश्चिम बंगाल के विधान-सभा चुनावों में झोंक दी थी । केंद्र की सियासत का शायद ही कोई हिस्सा होगा जो चुनाव प्रचार के लिये पश्चिम बंगाल में न डटा रहा हो । चाहें वह मंत्री हो या फिर प्रवक्ता ।

292 विधान-सभा सींटों में से 213  तृणमूल कांग्रेस को एवं 77  बीजेपी को मिली । कांग्रेस  एवं वामपंथी दलों की स्थिति शून्य रही । चुनाव में अच्च्छे परिणाम मिलने के बावजूद भी नहीं ला सकी भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव । पिछले चुनावों से पार्टी की प्रफारमेंस खासा बदलाव आया है । 10 से 40 प्रतिशत पहुँच गई है । 


कोविड 19 संक्रमण की दूसरी लहर के मध्य-नजर चुनाव आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद भी है नियमों को ताक में रखकर कोलकोता एवं पश्चिम बंगाल के अन्य शहरों में जमवाड़ा लगाकर जश्न मनाये जाने के समाचार मिले हैं ।

मौजूदा चुनाव परिणामों के मध्य-नजर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनना तय है । कहीं न कहीं भारी पड़ा भारतीय जनता पार्टी पर सीएए एवं एनआरसी का मुद्दा....

 

हिंसा एवं टकराव की बिसात पर बंगाल की राजनीति

मोटा भाई के शंखनाद से कहीं न कहीं  अंदर तक हिल गई है बंगाल की दीदी एवं तृणमूल कांगेस । और हिले भी क्यों नहीं बंगाल में विधान-सभा के लिये आठ चरण में मतदान जो संभावित हैं । मतदान की प्रक्रिया 27 मार्च से शुरू होकर 29 अप्रेल को समाप्त हो जायेगी । मतगणना की तारीख 2 मई मुकरर है ।


294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल की इस विधान-सभा की राजनीति के पेच कुछ अलहदा हैं । हिंसा एवं टकराव की बिसात पर बिछी है यहाँ की राजनीति । चुनाव हो और हिंसा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता । वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी ने अपनी पुस्तक "रक्तरंजित बंगाल-लोकसभा में भी चुनाव 2019" में 2011 से लेकर 2019 तक विभिन्न राजनीतिक पड़ावों हिंसा,संघर्ष एवं धांधली का विस्तार से जिकर किया  है ।


यहाँ फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की सरकार है एवं आगामी चुनावों में भरतीय जनता पार्टी एवं तृणमूल कांग्रेस में काँटे की टक्कर है । इस बार के चुनावी मुद्दों में  हिंदुत्व के साथ सीएए एनआरसी सहित स्थाननीय मामलों का  भी समावेश रहेगा । फिलहाल रैली एवं जनसभाओं के माध्यम से दावेदारी साबित करने का दौर है ।


आंतरिक कलह का कहीं न कहीं खमियाजा भुगतना पड़ सकता है बंगाल की दीदी मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी एवं उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को । दीदी के भतीजे अभिषेक बेनर्जी का परिवार ईस्टरन कोलफील्ड घोटाले के मामले में मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है । अभिषेक बेनर्जी पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ लोक-सभा सदस्य भी हैं ।


मौजूदा राजनीतिक परिवेश के मध्य-नजर नहीं होगा आसान किसी भी एक के लिये अपना वर्चस्व साबित करना । राजनीति के चाणक्य द्वारा रचित व्यूह रचना के परिणामों का खुलासा तो समय आने पर हो ही जायेगा...


 

ट्रेक्टर रैली के नाम पर बलवाइयों का तांडव

ट्रेक्टर मार्च ने लिया आक्रमक रूख । ऐन गणतंत्र दिवस के दिन जब राजपथ से परेड निकल रही थी, तीन कृषि बिल को खारिज किये जाने की माँग को लेकर निकाली जा रही किसानों द्वारा ट्रेक्टर रैली में शामिल बलवाइयों ने दिल्ली के कई इलाकों में मचाया तांडव । जमकर हुई तोड़-फोड़ एवं पत्थरबाजी ।


सोची समझी साजिश के तहत पुलिस द्वारा निर्धारित मार्ग से जुड़े हए मघ्य मार्गों पर लगाये गये बेरिकेटों को ट्रेक्टर से तोड़कर बलिवाईयों का हजूम लाल किले एवं आई टीओ पहुँचा । लाल किले पर फहराया अपना झंडा । अन्य स्थानों से भी पत्थरबाजी एवं तोड़-फोड़ के समाचार मिले  हैं ।


किसान नेताओं,पुलिस एवं सियासतदानों की भूमिका पर लगा प्रश्न चिंह । किसान नेता कहकर झाड़ा जिम्मेवारी से पल्ला किसान आंदोलन अब हाईजेक हो गया है । बलवा करने वाले किसान नहीं । रही बात पुलिस कि तो हुकमरानों के आदेश के बिना नो लाठी चार्ज नो आशु गैस । चाहें बलवाई पत्थर मारकर घायल करें या ट्रेक्टर से कुचलने की कोशिश ।

तेज रफतार से चलता हुआ ट्रेक्टर बेरेकेट से टकराकर पलट जाता है और उसमें सवार किसान रूपी बलवाई की मौत हो जाती है । जुड़ जाता है एक और नाम शाहदत की लिस्ट में । बेकाबू बलवाइयों को रोकने की कोशिश में 394 से भी अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए । कुछ एक की हालत गंभीर है ।


मौजूदा  परिप्रेक्ष्य के मध्य-नजर जेहन में हैं बहुत से सवाल लाल किले पर फहराया गया झंडा किसका है ? बलवाइयो ने लाल किला ही क्यों चुना ? आखिर लाल किले मे झंडा फहराकर क्या साबित करना चाहते हैं यह बालवाई ?
 राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल होने से अब जरूरी हो गया है सियासतदानों के लिये बलवाइयों से सख्ति से निपटना.....



 

72 वें गणतंत्र दिवस का आकर्षण राम मंदिर की झांकी

सुरक्षा इंतेजामात एवं एहतियात के साथ मनाया जा रहा है देश भर में 72 वाँ गणतंत्र दिवस समारोह । कोरोना संक्रमण के मध्य-नजर इस बार राज पथ से निकलने वाली परेड को देखने वाले दर्शकों की संख्या सीमत है ।याने कि 20 प्रतिशत से भी कम रही । किसी ने टीवी पर तो किसी ने घर की छत पर खड़े होकर आसमान में तिरंगाा बनाते हुए वायु सेना के विमानों को देखकर अपनी हसरत पूरी की ।

इस बार का आकर्षण रही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की लोकल फार वोकल  एवं उत्तर प्रदेश की राम मंदिर की झांकी । इस बार के परेड कमांडर थे दिल्ली के लेफ्टिनेंट जनरल विजय कुमार मिश्रा ।  धनुष टंकार परिवार की सभी देशवासियों को गंतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें । पेश है  एक झलक......


 


किसान आंदोलन का रूख कहीं पंजाब में संभावित चुनाव तो नहीं

किसानों से प्रघान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी की मुलाकात के लिये 3 दिसंबर का दिन मुकरर होने के बावजूद आखिर क्यों दिखाई दे रही है पंजाब-हरियाणा के किसानों में दिल्ली में पहुँचने  की उतावली ? सिंधू बार्डर पर पुलिस के साथ जोर अजमाइश करने वाले क्या वास्तव में किसान थे या फिर किसानी का जामा ओढ़े अढ़ातियों एवं जमींदारों के नुमाइंदे ? जेहन में बहुत से सवाल हैं जिनका खुलासा होना अभी बाकी है ।


प्रदर्शन कर रहे इन किसानों को विपक्ष का समर्थन प्राप्त है । हरसूल बार्डर पर एकत्रित प्रदर्शनकारियों के खाने की व्यवस्था दिल्ली की 9 मस्जिदों द्वारा की जा रही है । हालांकि सोनिपत के मशहूर अमरीक सुखदेव ढ़ाबे द्वारा भी प्रदर्शनकारी किसानों को  खाने-पीने का निःशुल्क मुहैया कराया जा रहा है । एनआरसी एवं सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं के खाने की व्यवस्था बब्बर खलसा ग्रुप ने की थी ।

पहले सीएए एवं एनआरसी के मामले में और अब किसान जन-आंदोलन के लिये आखिर क्यों हो गाया है एकत्रित विपक्ष ? कांग्रेस पार्टी ने जहाँ हरसूल बार्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा प्रेशर पाइप से जल फेंके जाने एवं लाठी चार्ज को दमनकारी बताया है वहीं आम आदमी पार्टी  ने  पुलिस एवं खुफियातंत्र को धत्ता देकर आम आदमी पार्टी के 9 विधायकों द्वारा उनके पंजाब के प्रभारी जरनैल सिंह के नेतृत्व में प्रधान-मंत्री आवास पर हल्ला बोलने का दावा किया है ।  


हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि संसद द्वारा पारित यह बिल बिचैलियों एवं अढ़तियों की मोनोपली तोड़कर किसानों को वाजिब एवं उचित दामों पर दामों पर फसल बेचने की स्वतंत्रता देते हैं । प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने भी बनारस में आज अपने भाषण में कृषि बिल का उल्लेख किया है तथा किसानों से फिरकापरस्तों से सावधान रहने की ताकीद की है  । पंजाब में विधान-सभा चुनाव संभावित  हैं । कहीं यह मामला किस्सा कुर्सी का तो नहीं .....

 

बिहार में फिर एक बार यूपीए का परचम

तमाम अटकलों एवं मीडिया पर चल रही कवायदों के पलट बिहार विधान-सभा चुनावों में एक बार फिर नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन को मिला पूर्ण बहुमत । 1977 के लोकसभा चुनावों के बाद शायद यह दूसरा लोकतांत्रिक चुनाव होगा जिसमें चुनाव परिणाम रूझान के पलट रहे । विशेषज्ञ जिसे स्विंग का नाम देते हैं ।


एक बार फिर मोदी की लहर ने बिहार के विधान-सभा की बाजी पलट दी । यूपीए गठबंधन को 125,महा गठबंधन को 106 एवं चिराग पासवान की पार्टी लोक जन शक्ति पार्टी को मात्र एक सीट मिली । इसमें दोराय नहीं कि  महागठबंधन एवं  यूपीए गठबंधन के बीच काँटे की टक्कर रही लेकिन चुनाव में कांग्रेस की प्रफोरमेंस ने पूरी बाजी ही उलट दी । कांग्रेस को 70 सीटों में से मात्र 19 सीटों में विजय हासिल हुई ।


इस चुनाव में  जीत किसी को भी मिली,दो राय नहीं कि  तेजस्वी यादव के नेतृत्व आरजेडी एक शक्तिशाली पार्टी के रूप में उभर कर आई है । केंद्रिय गृह मंत्री अमित भाई शाह ने इस जीत को बिहारवासियों की आशाओं एवं आकांक्षाओं की जीत मानते हुए नरेंद्र भाई मोदी एवं नितीश कुमार के डबल इंजन विकास की जीत बताया है....

 

बिहार में इस बार का चुनावी मुद्दा है विकास

बिहार के मौजूदा राजनैतिक  समीकरण के मध्य-नजर नहीं होगा आसान किसी भी गठबंधन के लिये एक तिहाई बहुमत से सरकार बनाना । शायद यह राजनीति का समीकरण जोड़-तोड के साथ ही पूरा हो । 243 विधान-सभा सीटों वाले बिहार राज्य में तीन चरण में चुनाव संभावित हैं  ।  28 अक्टूबर को 71 सीटों पर, 3 नवंबर को 94 सीटों पर एवं 7 नवंबर को 78 सीटों पर मतदान होगा । मतगणना की तारीख आगामी 10 नवंबर को मुकरर है ।

बिहार में राजनीति के पंडितों की अटकल है कि आगामी चुनावों में बीजेपी का जेडीयू के साथ एवं अप्रत्यक्ष रूप से एलजेडी के साथ गठबंधन है । दूसरी तरफ कांग्रेस का आरजेडी को समर्थन है । दिलचस्प बात यह है कि एलजेडी लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है एवं उसके नेता चिराग पासवान दिवंगत नेता रामविलास पासवान के बेटे हैं । माकूल सीटें मिलने पर बिहार की राजनीति में चिराग पासवान की भागीदारी एवं दावेदारी फिलहाल सवालिया है ।


आगामी विधान-सभा चुनावों से नीतिश,तेजस्वी एवं चिराग तीनों का ही भविष्य जुड़ा है । सभी दलों के दिग्गज नेता बिहार में डेरा डाले हैं एवं कोरोना के इस महाकाल में भी जन सभाओं का जोर है । आरोपों एवं प्रत्यारोपों के साथ वायदों को मीठी चासनी लपेटकर मतदाताओं को रिझााने का प्रयास जारी है । इस बार का चुनावी मुद्दा है  विकास । क्या वास्तव में बिहार का मतदाता उब चुका है एवं बदलाव चाहता है और या फिर यह  मात्र चुनावी जुमला है ।


जाति एवं लाठी की बिसात पर बिछी बिहार की राजनीति के मध्य-नजर विकास के  भविष्य का खुलासा समय के साथ हो ही जायेगा .....

 

जातिगत एवं सांप्रदायिक एंगल से चमकती राजनीति

राजस्थान के करोली में हुई एक पुजारी की जलाकर निर्मम हत्या को लेकर जहाँ पूरे देश में सनसनी है वहीं देश का एक राजनीतिक तबके में छाई है अजीब सी खमोशी । यह वही राजनीतिक तबका है जिसके बेनर तले हाथरस में इंसाफ के लिये रोजाना धरना-प्रदर्शन एवं चक्का जाम होता है ।आखिर इस खामोशी का राज क्या है । हाथरस में रोज दिखाई देने वाले कांग्रेस के नेता राहुल एवं प्रियंका गाँधी वाडरा क्यों नहीं दिखे करोली में । ना ही लाल टोपी लगाकर समाजवादी पार्टी के किसी कार्यकत्र्ता ने घेराव कर प्रशासन पर दबाव बनाया  और ना ही आम आदमी पार्टी के संजय सिंह दिखे ।

शायद जरूरत ही नहीं समझी क्योंकि ना तो यह मामला दलित से संबंधित है और ना ही सांप्रदायिक विशेष से संबंधित । यह तो जमीन के विवाद को लेकर पुजारी को जिंदा जलाने का मामला था । जातिगत और सांप्रदायिक ऐंगल से राजनीति चमकती भी तो भला कैसे । पीड़ित परिवार के साथ कोई दिखे तो दिल्ली से  बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा जिन्होंने अपने बूते पर 25 लाख रूप्ये एकत्रित कर पीड़ित परिवार को  दिये और गाँव वाले। । राजस्थान की सियासत से जुड़ी एक शख्सियत का कहना था कि यह मामला हाथरस से अलग है ।

यदि देखा जाये तो राजस्थान में विपक्ष एवं देश की सबसे बड़ी पार्टी की भूमिका चंद नेताओं की बयानबाजी के अलावा कुछ खास नहीं रही । इस मामले में दो आरोपियों को गिरफतार किया गया है एवं तहकीकात जारी है । राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रूप्ये की राहत राशि एवं नौकरी दिये जाने का ऐलान किया है । इन सबके बीच विचारणीय है तो बस जातिगत एवं सांप्रदाय विशेष के नाम पर चमकती राजनीति.....

हाथरस मामले में तुष्टिकरण की राजनीति

हाथरस काँड से जन-मानस का स्तब्ध होना लाजमी है । इंसाफ के लिये कहीं न कहीं आवाज उठाया जाना भी जायज है । इन सबके के बीच कहीं न कहीं विचारणीय है इंसाफ के नाम पर सिक रही राजनैतिक रोटियाँ ।  हालाँकि मौजूदा सरकार ने डीसी एवं पुलिस अधिक्षक सहित क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए सीबीआई द्वारा जाँच की पेशकश की है ।


14 सितंबर को हाथरस के एक गाँव की खेतों से चारा लेने जा रही 19 साल की लड़की का गाँव के कुछ लड़कों ने बलात्कार किया । बलात्कारियों के साथ मुकाबले के दौरान पीड़िता की रीढ़ की हड्डी टूट गई । जीवन मौत के संघर्ष बीच 15 दिन के बाद दिल्ली के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई । ओटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की मौत कुंद बल घात से रीढ़ की हड्डी का टूटना है न कि बल-अजमाइश । पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में गुप्ताँगों में पुराने जख्मों का तो जिकर है लेकिन बलात्कार का जिकर है । इस प्रकरण में गाँव के चार युवकों को नामजद किया गया है संदीप,रामू,लवकुश एवं रवि ।

परिवार की वक्त के अनुसार बदलती बयानबाजी एवं राजनैतिक दलों के बढ़ते घेराव से मौजूदा सरकार एवं स्थाननीय प्रशासन की सरदर्दी बढ़ गई है । आये दिन हो रहे धरने-प्रदर्शन एवं चक्का जाम से फिलहाल हाथरस की कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है ।  यदि गौर फरमाया जाये तो केस के पेच उलझे हुए हैं । पोस्टमार्टम की एवं आटोप्सी रिपोर्ट मे बलात्कार की पुष्टि ना होने के बावजूद बलात्कार होने का राजनीतिक दबाव और पुलिस द्वारा बिना परिजन की रजामंदी लिये चुपचाप शव को जलाया जाना कहीं न कहीं मामले की सुई घुमा देता है ।


जहाँ तक इंसाफ का सवाल है वो पीड़ित पक्ष को मिलना ही चाहिए विचारणीय है तो बस इंसाफ दिये जाने के नाम पर जाति एवं तुष्टिकरण की राजनीति....
 

गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ

हर बार की तरह इस बार भी गणपति आया और फिर वापिस लौट गया अगले साल  फिर से आने का वादा करके । यह बात और है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दिशानिर्देशों के अंतगर्त इस बार के गणपति छोटे एवं पंडाल का आकार सीमित था ।
मायानगरी मुंबई में इस बार गणपति शांतिपूर्ण विदा हुए । ज्यादातर पंडालों में ही विसर्जन की व्यवस्था थी । कुछ एक ने गणपति को बीएमसी की गाड़ी में विदा किया और बीएमसी ने पूर्व निर्धारित स्थानों पर विलय किया ।
इस बार व्यापक स्तर पर गणपति पूजा का आयोजन एवं समुद्र तट पर विसर्जन वर्जित था । आयोजकों के अनुसार इस बार लाल बाग के राजा की भव्य प्रतिमा की जगह 11 दिन तक प्लाजमा एवं रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया ।
आयोजन सीमित स्तर पर ही सही श्रद्धालुओं के मन में बस एक ही आस गणपति बप्पा मोरया पुढ़ल बरस तू लोकर आ.......

बालीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या या आत्महत्या

बालीवुड अभिनेता सुशांत राजपूत ने क्या आत्महत्या की थी या फिर उनकी हत्या हुई थी, एक सोची-समझी साजिश के तहत । रहस्यों पर से खुलासा  अभी बाकी है । सुप्रिम कोर्ट के निर्देशानुसार केंद्रिय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा गठित टीम द्वारा तहकीकात जारी है । हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पड़ सकता है जाँच कर रही टीम को आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना ।


सोशल मीडिया एवं मीडिया में  चल रही अटकलों के मध्यनजर यह एक सोची-समझी साजिश के तहत  हत्या का मामला है । परिवार वालों ने भी हत्या का मामला मानते हुए कुछ को प्रतिवादी बनाया है । मामले के उलझे हुए पेचों के मध्य सिने एवं राजनीति की कुछ हाई प्रोफाइल हस्तियों की भागीदारी की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।


यदि सुशांत सिह राजपूत की हाइट एवं कमरे की छत की ऊँचाई को देखा जाये तो पंखे से लटककर आत्महत्या  नामुमकिन है । अफरातफरी में  परिवार के सदस्यों को भी अस्पताल एवं घर से दूर रखा गया । परिवार के सदस्य शमशान ने शमशान से ही उन्हें अंतिम विदाई दी । अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बावजूद भी सुशांत की सहयोगी रिया चक्रवर्ती एवं कुछ एक को  मोरचरी में शव के पास जाने दिया गया ।


जाँच के लिये आये बिहार पुलिस दल को स्थाननीय पुलिस द्वारा सहयोग के बजाये 14 दिन के लिये क्वारनटाइन किये जाने के  कारण, कहीं न कहीं सवाल स्थाननीय पुलिस की जाँच पर भी उठते हैं । क्वारनटाइन होने के बाद इस जाँच दल को खाली हाथ वापिस लौटना पड़ा । गौर फरमाने की बात यह है कि इस दल में भारतीय पुलिस सेवा स्तर के अधिकारी शामिल थे ।


केंद्रिय अन्वेषण ब्यूरो की टीम की मदद एआईआईएमएस के फोरंसिक एक्सपर्ट डाक्टरों की टीम कर रही है । यह टीम जाँच दल को फोरंसिक ऐंगल से जाँच करने में मदद करेगी । फिलहाल संदिग्धों के साथ जवाब तलब का दौर है । जाँच दल की रिपोर्ट का खुलासा तो वक्त आने पर हो ही जायेगा । तमाम कवायदों के बावजूद क्या मिल पायेगा सुशांत को इंसाफ....

 

आत्मनिर्भर भारत देश के लिये महामंत्र

दिल्ली के लाल किले से अपने उदबोधन में प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने  सैनिकों की वीरता को याद करते हुए एवं सरकार की उपलब्धियाँ गिनवाते हुऐ मौजूदा चुनौतियों से निपटने में आत्मनिर्भर भारत को मूल मंत्र बताया ।


वह 74 वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में लालकिले में आयेजित ध्वजारोहण समारोह में तिरंगा फेहराने के बाद देश को संबोधित कर रहे थे । बाटला हाउस एनकाउंटर में फर्ज को अंजाम देते हुए शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा एवं स्पेशल पुलिस आयुक्त राजेश खुराना सहित दिल्ली पुलिस के 35 पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों को पुलिस मेडल से संमानित किया गया ।



देश भर में मनाई जा रही है देश की आजादी की 74 वीं  वर्षगाँथ धूम-धाम से । सियसतदानों ने लाल किले पर तो आम नागरिकों ने कोरोना वायरस संक्रमण के मध्यनजर दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए  धर पर ही टेलीविजन में प्रोग्राम देखकर और बच्चों एवं युवाओं ने छत पर पतंग उड़ाकर मनाया स्वतंत्रता दिवस .....
 

भूमि पूजन के साथ शुरू हुई राम लला के गृह निर्माण की तैयारी

आखिर 492 साल बाद राम लला को एक बार फिर मिला इनका घर । जी हम बात कर रहे हैं अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि की जिसे बाबर द्वारा 1525 में तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी एवं मुस्लिम समाज में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है ।


प्रधान-मंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंचालक डा मोहन भागवत, उत्तर-प्रदेश के मुख्य-मंत्री योगी आदित्य नाथ एवं साधु संतों की मौजूदगी में किया रखी शिला एवं संपन्न हुआ भूमि पूजन ।


नक्शा तैयार होने के बाद शुरू होगी मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया । राम लला को  जल्द ही मिलेगा उनका घर साथ ही अयोध्या को मिलेगा का नया स्वरूप । सुप्रिम कोर्ट द्वारा 70 साल से लंबित मामले पर दिये ऐतिहासिक फैसले के बाद राम जन्म भूमि को स्वरूप दिये जाने का यह पहला चरण है ।


फिलहाल राम जन्म भूमि से लगभग दो किलोमीटर स्थित राम जन्म भूमि कार्यशाला में पत्थरो को तराशने का काम पुरजोरों पर है । मंदिर के निर्माण में लगभग 35000 घनफुट पत्थरों की खपत अनुमानित है । यह कार्यशाला राम जन्म भूमि न्यास द्वारा संचालित है ।


राम मंदिर के निर्माण में राजस्थान के बंसीपुर से लाये गये पत्थरों की औसतन आयु को 1000 साल आंका गया है । 1000 साल तक इन पत्थरों की गुणवता में कोई  फरक नहीं पड़ेगा । पूर्व निर्घारित ढ़ाँचे से वास्तिविक ढ़ाँचे का आकार दुगना होगा गर्भ गृह के ऊपर अब शिखर होगी पहले के दो गुंबद की योजना के बजाय अब 5 गुंबद होंगे ।


मंदिर की ऊँचाई भी अब पहले की निर्धारित से अधिक याने कि 161 फिट होगी । भवन निर्माण की शैली उत्तर भारत पर आधारित नगारा स्टाइल होगी । निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मंदिर के निर्माण में 3 से 3.5 साल लग जायेंगे । फिलहाल अयोध्या ही नहीं पूरे देश में जश्न का माहौल है ।


इन सबके बीच नहीं भुलाया जा सकता इस मुहिम को जीवंत रखने में विश्व हिंदू परिषद की स्वर्गीय अशोक सिंघल की भूमिका एवं कोठारी बंधुओं के बलिदान को.....

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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27 - लाभकारी मूल्य की माँग को लेकर किसान देंगे 8 सितंबर को धरना-प्रदर्शन

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29 - नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक अदालत में 31 अगस्त को

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31 - 1 सितम्बर से चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर

32 - कांग्रेस पार्टी दलित समाज की महापंचायत का आयोजन

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