
दिल्ली: गुरु टेग बहादुर जी कि अवमानना का मुद्दा गरमाया । नेता विपक्ष सुश्री आतिशी द्वारा गुरु महाराज के लिए अभद्र टिप्पणी को लेकर पक्ष एवं विपक्ष के विधायक हुए आमने-सामने । नतीजन शुरू होने के चंद लम्हे बाद ही दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही कल सुबह तक हुई मुल्तवी । इस बाबत मंत्रियों एवं विधानसभा संचेतक के प्रतिनिधि मंडल ने विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता से मुलाक़ात कर ज्ञापन सौपा एवं मामले की संवेदनशीलता के मद्देनजर सुश्री आतिशी की विधानसभा रद्द करने की माँग की । मंत्रियों के इस प्रतिनिधि मंडल में मनजिंदर सिह सिरसा, कपिल मिश्रा, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा एवं अभय वर्मा आदि के नाम शामिल हैं ।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिनिधि मंडल की माँग है कि क्यूंकि नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन के अंदर ने अपनी सीट से खड़े होकर श्री गुरु तेग बहादुर जी के बारे में दिया गया वक्तव्य अभद्र, शर्मनाक और मर्यादाहीन है उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए, उनकी दिल्ली विधानसभा से तुरंत प्रभाव से सदस्यता रद्द होनी चाहिए और उन्हें जेल की सजा दी जानी चाहिए । उनका मानना है कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का अपमान करने वालों का स्थान सदन नहीं, बल्कि तिहाड़ जेल होनी चाहिए।
दिल्ली सरकार के मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार भारतीय संस्कृति में 'गुरु' का स्थान भगवान से भी ऊपर है, लेकिन अहंकार में डूबी आतिशी जी ने सदन की गरिमा और गुरुओं का अपमान कर अपनी संवेदनहीनता का परिचय दिया है। सवालों से डरकर और अपनी जवाबदेही से बचकर, वह कायरो की तरह दिल्ली छोड़ गोवा भाग गईं । उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सिख पंथ के अग्रणी संगठन दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने भी विधानसभा सदस्य से मिलकर आपत्ति जताई है। वहीं दिल्ली सरकार के अन्य मंत्री कपिल मिश्रा का कहना है कि कल जब दिल्ली विधानसभा में हो रहा था गुरुओं का सम्मान , तब नेता विपक्ष सुश्री आतिशी ने बहुत भद्दी और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया । मीडिया से रूबरू होकर उन्होंने सदन की रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए लगाया सवालिया निशान क्या ऐसे व्यक्ति को पवित्र सदन में रहने का अधिकार है ?