
दिल्ली: 1984 में हुए सिखों के कत्लेआम के मुख्य आरोपियों में से एक सज्जन कुमार को उसके किए कभी न भूलने वाले जुर्मों से अदालत द्वारा बरी कर दिया, जिससे देश में सिखों के खिलाफ हो रहे ज़ुल्म और अन्याय के अमानवीय और गैर-कानूनी कामों को याद करवा दिया गया । दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी की सीनियर सदस्य बीबी रंजीत कौर ने सज्जन कुमार को बरी करने का कोर्ट का कदम कत्लेआम के पीड़ितों के साथ-साथ पूरे सिख समुदाय का दिल तोड़ने वाला फैसला बताया । इस बड़े कातिल को बरी करके हुक्मरानों ने यह साबित कर दिया है कि सिख समुदाय के लिए लोकतंत्र कहे जाने वाले इस देश में सिख समुदाय को कोई इंसाफ नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि अदालत को यह देखना चाहिए था कि 1 नवंबर से 4 नवंबर तक सिखों को निशाना बनाया गया और हजारों बेगुनाह सिखों को मारा गया, जिसकी लीडरशिप उस समय के कांग्रेसी नेताओं सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, हरकिशन भगत, बलवान खोखर, महेंद्र यादव ने की थी। सिखों की अरबों खरबो रुपये की प्रॉपर्टी जला दी गई और लूट ली गई और सिखों को इंसाफ का इंतज़ार करते हुए 41 साल हो गए, जिसमें से बड़ी संख्या में इस हत्याकांड के पीड़ित दुनिया छोड़ गए, और अब कातिलों के हक में फैसला देकर इंसाफ की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान और सेक्रेटरी ने कोर्ट के दिए इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है, जिसका स्वागत किया जाता है।