दिल्ली: सेंटेंस रिव्यू बोर्ड द्वारा प्रोफेसर देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर की रिहाई की अर्जी फिर एक बार ख़ारिज किए जाने पर शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रोफेसर भुल्लर अपनी सजा पूरी करने के बावजूद भी जेल में बंद हैं । बार बार दावों के बावजूद दिल्ली सरकार में केबिनेट मिनिस्टर मनजिंदर सिंह सिरसा सिख क़ैदियों को रिहा करवाने में असफल रहे हैं । नैतिकता के आधार पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए ।

मीडिया से रूबरू हो कर उन्होंने जानकारी दी कि सिख अधिकारों के रक्षक के तौर पर मनजिंदर सिंह सिरसा की पब्लिक इमेज सामने आई है । सिरसा ने अपने रसूख और कमिटमेंट के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन ज़मीनी नतीजे राजनीतिक इच्छाशक्ति की पूरी कमी दिखाते हैं। सरना ने आगे कहा कि ऐसी बार-बार नाकामियों के बाद भी पद पर बने रहना नैतिक मूल्यों को कुर्बान करने जैसा है। सिख समुदाय से कहा गया था कि सत्ता में उनकी आवाज़ देश को रिप्रेजेंट करेगी। लेकिन आज यह दावा खोखला साबित हो रहा है। अगर सिरसा इतने साफ़ मामले में न्याय पक्का नहीं कर सकते, तो उन्हें मंत्री बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है ।
भार तीय जनता पार्टी की भी आलोचना करते हुए उन्होंने सिखों के साथ अपने रिश्तों में दोगलापन करने का लगाया आरोप कहा कि भारतीय जानता पार्टी ने सिंबल के ज़रिए चुनावी गुडविल चाहा, जबकि जेल में बंद सिखों की रिहाई की कानूनी और तय मांगों को पूरा करने से इनकार कर दिया। सत्ता में बैठे लोगों का मैसेज बहुत परेशान करने वाला है। पगड़ी फोटो के लिए पहनी जाती है, लेकिन जब बंद दरवाजों के पीछे फैसले लिए जाते हैं, तो सिखों की चिंताओं और मांगों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।