
दिल्ली: बेशक मुख्यमंत्री ने पॉलिसी को लांच करने का उदेश्य जीरो एमीशन व्हीकल को बढ़ावा देकर दिल्ली को प्रदूषण मुक्त एवं स्वच्छ परिवहन वाली राजधानी बनाने का बताया हो, लेकिन दिल्ली की 2.5 करोड़ से अधिक जनसंख्या के अनुपात में क्या दिल्ली में वर्तमान में 4.7 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 1900 चार्जिंग स्टेशन पर्याप्त हैं? जबकि 2026 के 5 महीनों में 9471 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए था। दिल्ली के उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 को 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू करने के आदेश देने से पहले दिल्ली के लाखों इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए भी दिशा निर्देश जारी करे, क्योंकि अभी दिल्ली में मौजूद ईवी के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नही हैं।
दिल्ली के 1900 चार्जिंग स्टेशनों में अधिकतर चार्जिंग स्टेशन तकनीकी खराबी के कारण बंद रहते है और चार्जिंग स्टेशनों पर लंबी-लंबी लाईने वाहनों को चार्ज कराने के लिए लगी रहती है। सरकार को इलेक्ट्रिक व्हीकल पालिसी लागू करने से पहले चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना चाहिए था। 1 जुलाई से लागू पाॅलिसी में इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए सरकार के 100 प्रतिशत रोड़ टैक्स एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क में छुट देने का ऐलान के बाद बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में अधिक वृद्धि तो होगी, लेकिन उनके चार्जिंग के लिए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की योजना का अभी तक सरकार द्वारा उजागर नही करना दिल्ली की जनता को अंधेरे में रखना है।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा कि दिल्ली में 1 जनवरी, 2027 से तिपहिया वाहनों का पंजीकरण इलेक्ट्रिक में होगा, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों में चार्जिंग की कम क्षमता और चार्जिंग स्टेशनों की कमी के कारण पिछले समय लोगों ने अपनी आजीविका के साधन तिपहिया वाहनों इलेक्ट्रिक में खरीदना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को बरगला और भ्रमित करके नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लागू करके एक नई लूट का रास्ता साफ कर रही है। दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाना सिर्फ दिखावा है, जबकि पिछले 15 महीनों में प्रदूषण खत्म करने में कोई काम नही किया है।