चुनावी बिगुल बजते ही पश्चिम बंगाल में मची सियासी हलचल । मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने दिया अपने अधीन 23 विभागों एवं निकायों से दिया इस्तीफा । हालांकि इसे पारदर्शिता एवं प्रशासनिक संतुलन के लिहाज से अहम फैसला बताया जा रहा है, भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनावों के मद्देनजर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती । सत्ता के इस महाभोज में दोनों ही राजनीतिक घटकों के बीच रस्सा कसी जारी है । 294 विधानसभा सीटों पर अगले माह चुनाव संभावित है । चुनाव दो चरणों में होगा एवं दावेदारी के लिए 148 सीटें हासिल करना जरूरी है ।
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यहाँ पर तृणमूल कांग्रेस एवं भारतीय जनता पार्टी की काँटें की टक्कर है । इस मुकाबले में वामपंथी एवं कांग्रेस हाशिए पर हैं । तीन बार मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी इस बार भी तृणमूल कांग्रेस का चेहरा बनकर मैदान में उतरी हैं । वह भवानीपुर विधान सभा सीट से भारतीय जानता पार्टी के कद्दावर नेता एवं पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ मैदान में उतरी हैं । 2021 के चुनाव में नंदीग्राम विधान सभा सीट पर शुभेंदु अधिकारी से 1956 वोटों से हारी थी । फिलहाल वह भवानीपुर सीट से विधायिका हैं । माँ माटी और मानुस की बात करने वाली ममता बैनर्जी यदि इस बार भी चुनाव जीत जाती हैं और उनकी पार्टी सत्ता में आ जाती है तो वह पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी जो लगातार चार बार सियासत की बागडोर संभाली है । इस बार का चुनाव उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है । चुनाव से पहले हुई एसआईआआर प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.02 करोड़ रह गई है । 60 लाख नाम अब भी निर्णायक प्रक्रिया के अधीन हैं । क्यूंकि ममता बैनर्जी का मतदाता एक सेट क्लास है इसका प्रभाव वोट बैंक पर पड़ने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।
पश्चिम बंगाल की राजनीति रक्त से रंजित है । इतिहास गवाह है कि यहाँ पर कोई भी चुनाव हिंसा एवं बिना खून की होली के सम्पन्न नहीं हुआ है । अपनी दबंगई एवं प्रखर व्यक्तित्व के कारण ममता बैनर्जी मीडिया के हलकों चर्चा में बनी रहती हैं । ऐसे में भारतीय जानता पार्टी के लिए भी ममता बैनर्जी के चरव्यूह को तोड़ना आसान नहीं होगा । अब देखना यह है कि ऐन चुनाव से पहले ममता बैनर्जी कौन सा खेला खेलती हैं । बाजी तृणमूल कांग्रेस के हाथ लगती है या फिर भारतीय जनता पार्टी के इसका खुलासा तो समय के साथ हो ही जायेगा ...