गोवा डोना पाउला के एक निजी अस्पताल में नाना ने लीं अंतिम सांस । उन्हें कार्डियक अरेस्ट के कारण आज तड़के 5.30 पर अस्पताल में दाखिल करवाया गया । जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया । अपनी डायलॉग डिलीवरी के कारण दशकों तक सिने प्रेमियों के दिल पर राज करने वाले नाना पाटेकर ने क्रांतिवीर, तिरंगा,परिंदा एवं खामोशी जैसी अनगिनत फ़िल्मों में अभिनय के जरिये अपनी एक अलग छाप छोड़ी । 1978 में उनके फिल्मी जीवन की शुरुवात गमन फ़िल्म के साथ हुई । लेकिन पहचान परिंदा फ़िल्म में खलनायक के रूप में हुई । हिंदी फ़िल्मों के साथ मराठी फ़िल्मों में भी उनकी एक अलग पहचान थी।

सिने जगत में अभिनय की उत्कृष्ट भूमिका निभाने के लिए उन्हें 2013 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया । उन्होंने सर्वश्रेष्ठ नायक, सर्वश्रेष्ठ सह नायक एवं सर्वश्रेष्ठ खलनायक की श्रेणियों में कई बार फ़िल्म फेयर अवार्ड से संमानित किया गया । एक्टर के साथ साथ नाना पाटेकर एक सफल फ़िल्म निर्देशक एवं पटकथा लेखक थे । 1991 में फ़िल्म प्रहार द फाइनल अटैक से उन्होंने सिने निर्देशन में अपना पहला क़दम रखा । उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था ।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वह 60 दिन भारतीय सेना के साथ बॉर्डर पर रहे । उनकी रेजिमेंट मराठा लाइट इंफेंट्री थी । 1990 से 2013 तक उन्होंने अपनी सेवायें प्रादेशिक सेना को दी । उनका अंतिम दायित्व मानद लेफ्टिनेंट करनल था । कारगिल युद्ध के दौरान वह मानद मेजर थे । वह 75 साल के थे । उनके निधन से देश भर में शोक की लहर है । स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन को बड़ी क्षति बताया है । आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राजकीय सम्मान के साथ उन्हें किया जाएगा पंच तत्वों में विलीन ।