
उसी शान शौकत के साथ निकाला लाल बाग चा राजा विसर्जन के लिए । लाल बाग के राजा चा अंदाज भले ही परंपरागत रहा हो लेकिन मुंबई में गणपति की झांकियों में खासा बदलाव आया है । अब अधिकांश झांकिया थीम ऑर कान्सैप्ट पर आधारित हैं । यदि बात नागपाड़ा पुलिस स्टेशन वासाहट के गणपति की झांकी की की जाये तो इस बार इनकी झांकी गोवेर्धन पर्वत पर आधारित है । इस बार की झांकी में गणपति की प्रतिमा के साथ भगवान कृष्ण को गोवेर्धन पर्वत को उठाये हुये दिखाया गया है ऑर उसके नीचे सरक्षण के लिए खड़े हुये गोकुलवासियों को दिखाया गया है ।
दिलचस्प बात यह है कि गणपति महोत्सव मुंबई एवं महाराष्ट्र की सीमा पार करके राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी उसी धूमधाम के साथ मनाया जाने लगा है । लेकिन माया नगरी मुंबई की कुछ बात ही अलग है । यहा गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक उत्सव मनाये जाने का एक अपना अलग अंदाज है । गणपति की प्रतिमा से लेकर विसर्जन तक हर दिन या यूँ कहिये मुंबईवासी का जीने का नजरिया ही बदल जाता है । वह इन पलों को खुलकर जीता है । नाच-गाना,ढ़ोल-नगाड़ों की ताल पर थिरकना गली कूचों में दिखना आम है ।
विसर्जन के पल को तो मुंबई वासी खुल के जी लेना चाहता है । विसर्जन के लिए जाती गणपति की छोटी बड़ी प्रतिमाओं के आगे डीजे एवं ढ़ोल नगाड़ों की तर्ज पर थिरकन के बीच उमर का पड़ाव जैसे थम सा गया हो । विसर्जन के लिए जाती प्रतिमाओं के दोनों तरफ खड़ी गणपति का जयकारा लगती हुई भक्तों की भीड़ । व्यवस्थ के इंतेजामत में मुंबई पुलिस एवं बीएमसी की टीम भी नहीं रहती है पीछे । सड़क पर सीटी बजाकर भीड़ को नियंत्रण करते हुये इनपर भी आपकी नजर पड़ ही जाएगी ।
इस बार आकर्षण का केंद्र थी झांकी । ऑर अंत में सबके मन में एक ही आस गणपति बप्पा मौरया पुधुल बरस तू लोकर आ । तो आइये गणपति की महिमा में खो जायें...