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दिल्ली: एक जिम्मेदार नागरिक द्वारा दी गई गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस को मिली नवजातकों की तस्करी के मामले में बड़ी सफलता । सेंट्रल रेंज पुलिस अभियुक्तों की धरपकड़ करती हुई सुरागों के आधार पर जा पहुंची बेगमपुर रोहिणी के हीरा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जहाँ पर तस्करी करके लाए गए बच्चों को फर्जी कागजात बनाकर मोटी रकम वसूलकर बेऔलाद दंपतियों को बेचा जाता था । इस मामले में अस्पताल की संचालिका एवं उसकी सहयोगी लैब टेक्निशियन को हिरासत में ले लिया गया है । संचालिका पीएचडी हैं लेकिन उनके पास मेडिकल की कोई वैधानिक योग्यता नहीं है । अस्पताल के फर्टिलिटी एंड आईवीआर विभाग द्वारा चल रहा था यह धंधा । डेढ़ से दो लाख में खरीदे गए नवजात को फर्जी दस्तावेज तैयार कर 6 से 8 लाख रुपये में बेचा जाता था ।
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पुलिस पहाड़गंज में रहने वाले एक जिम्मेदार नागरिक द्वारा दी गई सूचना के आधार पर हरकत में आई । नागरिक का कहना था कि उसने एक संदिग्ध महिला को देखा जिसकी गोद में नवजात था । कुछ दिन बाद वो महिला गायब हो जाती है फिर अचानक कुछ दिन बाद एक अलग नवजात को साथ लिए दिखाई देती है । पुलिस ने एक डिकॉय कस्टमर के माध्यम से आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास से उक्त महिला एवं उसकी अन्य महिला साथी एवं उनके पुरुष साथी कमल को धर दबोचा । कड़ियाँ जोड़ती जोड़ती पुलिस उदयपुर निवासी सायबाभाई घामर जो कि आजकल साँवर काँठा गुजरात में रह रहा था जिसे हम गिरोह का सरगना भी कह सकते हैं तक जा पहुँची । यह राजस्थान और गुजरात के विभिन्न इलाकों से नवजात शिशुओं के जरूरत मंद माता पिता से 10000 रुपये का टोकन अमाउंट देकर ख़रीद लेता था और नेटवर्क के माध्यम से आगे सप्लाई कर देता था । ज़्यादातर नवजात 4 दिन से लेकर 3 महीने के होते थे । आरंभिक जाँच से पता चला है उसने पिछले डेढ़ साल में 30 बच्चों की तस्करी की है । इस मामले में पुलिस ने 13 को गिरफ्तार किया हैं। तिलक नगर निवासी 34 वर्षीय ज्योति, टैगोर गार्डन निवासी 43 वर्षीय शीला, ललित लक्ष्मी नगर निवासी, प्रतिभा लैब टेक्निशियन, 45 वर्षीय ओमवती गुड़गांव में डोमेस्टिक हेल्प, 33 वर्षीय विपिन निवासी गोयला नगर पेशे से ड्राइवर जो कि इनके लिए ट्रांसपोर्टेशन का काम करता था, डॉ विवेकी उम्र 45 साल अस्पताल की संचालिका, मुकेश एवं रीना पाल, सन्नी अरोड़ा और अन्य महिला । और अंत में गिरोह का सरगना सायबाभाई । पुलिस ने अब तक तीन लाख की रिकवरी की है । फिलहाल अभियुक्त हिरासत में हैं एवं मामले पर तहकीक़ात जारी है ।
सेंट्रल जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार पुलिस को यह सफलता 15 दिन की मशक्कत के बाद हासिल हुई । साबर काँठा, पाली एवं अन्य इलाक़ों में दबिश के लिए तीन टीमों का गठन किया गया । पुलिस ने अबतक 5 नवजातों को बरामद किया है । दो और नवजातों की बरामदगी संभावित है । उनका कहना है की पुलिस को इस मामले में 50 से 60 फीसदी सफलता मिली है कोशिश जारी है । हीरा सुपर स्पेशलिटी की नवजातों की तस्करी में भागीदारी ने देश में चल रहे फर्टिलिटी एवं आईवीएफ सेंटरों को संदेह पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है ।कहीं न कहीं अब जरूरी हो गया है इनपर नकेल कसना । एक नॉन मेडिकल क्वालिफाइड द्वारा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का संचालन अपने आप में एक बड़ा सवाल है ।