


दिल्ली: एमसीडी में कांग्रेस की नेता नाजिया दानिश, दिल्ली के पूर्व मेयर फरहाद सूरी एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने मीडिया से रूबरू होकर किया एमसीडी बजट 2025-26 का पोस्टमार्टम । कहा कि दिल्ली नगर निगम विश्व का भ्रष्टतम निगम है और भाजपा ने बजट में अपने भ्रष्ट तंत्र को छिपाने की कोशिश करने का काम किया है। स्थाई समिति, सदन के नेता और आयुक्त द्वारा पेश किए गए बजट के आंकड़ों में विभिन्न साबित करती है कि भाजपा के दिल्ली के लिए इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 70 प्रतिशत क्षेत्र की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम की है जबकि बची हुई 30 प्रतिशत नई दिल्ली नगर पालिका परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड की है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के अनुसार बजट में भाजपा ने निगमायुक्त की वित्तिय शक्ति को 5 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ करके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पंगु बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि निगम में घाटे का बजट पेश किया जो 17583 करोड़ का रहा जबकि 17184 कोड़ के राजस्व का अनुमान बताया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम जिसकी प्राथमिकता सफाई और स्वच्छता है, उसमें पूरी तरह विफल साबित हुई। प्रतिदिन निकलने वाला 11000 मीट्रिक टन कूड़े में सिर्फ 8000 मीट्रिक टन कूड़े का निष्पादन होने के कारण दिल्ली में प्रतिदिन 3000 मीट्रिक टन कूड़ा दिल्ली की सड़कों, खुले क्षेत्रों और कालोनियों के बाहर दिखाई देता है। अनाधिकृत कालोनियों और गांवों में सफाई के लिए निगम द्वारा कोई कर्मचारी नही होता है जिसके कारण यहां गंदगी का बुरा हाल है।
पार्षदों का दैनिक बैठक भत्ता 300 से बढ़ाकर 3000 करके लोलीपॉप देने की बेबुनियाद घोषणा की है क्योंकि बिना केन्द्रीय गृहमंत्रालय की मंजूरी के निगम इसे लागू ही नही कर सकता है। उन्होंने कहा कि बजट के 17 हैड्स है जिन 12 हैड्स में बजट की बढ़ोतरी की है उनमें स्थायी समिति, सदन के नेता और मेयर के अंतर्गत आते है जिनमें 12 जोन और 24 कमेटियां शामिल है। गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली के प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बजट में कोई प्रावधान नही किया गया है। वृ़क्षरोपण, सड़कों की मरम्मत, गड्डों को भरने के लिए बजट में कोई प्रावधान नही रखा गया है।
बजट में स्थायी समिति ने पहले 2012 तक के 13000 दैनिक भोगी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कहा गया लेकिन सदन के नेता ने इसको 2016 कर दिया। एमटीएस कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की है लेकिन उनके 6-7 वर्षों के एरियर की कोई घोषणा नही की गई। भाजपा ने सभी कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था। कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों के साथ भाजपा धोखा कर रही है।
दिल्ली के भूतपूर्व मेयर का कहना है कि दिल्ली नगर निगम के 2026-27 के बजट पेश होने में भारी विभिन्नताएं सामने आई। निगम आयुक्त जो बजट पेश किया वह इनकम 15664 करोड़ और खर्चा 16530 करोड़ दिखाया गया। इसी को स्थायी समिति के अध्यक्ष ने बढ़ाकर इनकम 17044 करोड़ और खर्च 16797 करोड़ कर दिया लेकिन जब निगम में सदन के नेता यह पेश किया तो बजट इनकम 17184 करोड़ और खर्च 17583 करोड़ दिखाकर घाटे का बजट पेश किया गया ।
वहीं एमसीडी में कांग्रेस की नेता का कहना है कि प्रत्येक वार्ड में 5 यूरीनल बनाने बनाने के लिए 50 लाख तक की घोषणा की लेकिन किसी भी वार्ड में एक भी शौचालय नही बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 250 निगम वार्डों में आधे से अधिक में अनाधिकृत कालोनियां है जहां भाजपा शासित निगम ने कोई विकास की योजना नही बनाई है। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि निगम का यह बजट मात्र जुमला करार है और इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए ।