नई दिल्ली 27, Aug 2026

लेख

1 - आने वाले वर्षों में शक्ति की सप्तधारा से देश को मिलेगी नई गति

2 - रक्त रंजित राजनीति से मिली मुक्ति बंगाल में पहली बार निखरा कमल

3 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

4 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

5 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

6 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

7 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

8 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

9 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

10 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

11 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

12 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

13 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

14 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

15 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

16 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

17 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

18 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

19 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

20 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

21 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

22 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

23 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

24 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

25 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

26 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

27 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

28 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

29 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

30 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

31 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

32 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

33 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

34 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

35 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

36 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

37 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

38 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

39 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

40 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

41 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

42 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

43 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

44 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

45 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

46 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

47 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

48 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

49 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

50 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

राम मंदिर के नाम पर हुई लूट की फ़ोरेंसिक ऑडिट की मांग


दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर के चंदे की लूट कोई "छोटी-मोटी चूक" नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित और संगठित लूट थी। यह लूट महीनों तक CCTV कैमरों के सामने होती रही, लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद  अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चंदे की चोरी के कारण राम मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुँची है। उन्होंने सवाल किया, "BJP के रावण भगवान राम के सामने अपना चेहरा कैसे दिखाएँगे?" उन्होंने राम मंदिर लूट की फ़ोरेंसिक ऑडिट की मांग की, क्योंकि जो मामला सामने आया है वह तो बस एक छोटी सी झलक है और इस घोटाले को छिपाने की कोशिशें की जा रही थीं।

राजीव भवन स्थित DPCC ऑफिस में एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेंद्र यादव और महासचिव (संगठन) व संचार विभाग के चेयरमैन श्री अनिल भारद्वाज के साथ, उन्होंने कहा कि "असली सवाल यह नहीं है कि (राम मंदिर के चंदे की) चोरी किसने की, बल्कि यह है कि उन्हें ऐसा करने किसने दिया"। राम मंदिर के चंदे की लूट "आस्था का अपमान है, करोड़ों भक्तों के भरोसे के साथ धोखा है, और उस खामोशी का मामला है जो सत्ता के उन गलियारों से आ रही है जिन्होंने उस आस्था की रक्षा का वादा किया था"। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम - जिनकी देखरेख में मंदिर की ज़मीन का अधिग्रहण हुआ, निर्माण कार्य हुआ और चंदा प्रबंधन प्रणाली चलाई गई - SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम) की शुरुआती रिपोर्ट में कहीं भी नहीं है, जबकि निचले स्तर के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून, 2026 के बीच (सिर्फ़ 40 दिनों में), राम मंदिर के चंदा गिनती कक्ष से चोरी की 70 अलग-अलग घटनाएं हुईं और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने कहा है कि मंदिर का कामकाज मुख्य रूप से चंपत राय की देखरेख में हो रहा था, और उन्होंने "गलत जगह भरोसा किया था", "तो जब जवाबदेही तय करने का समय आया, तो उनका नाम (चंपत राय का) अचानक गायब क्यों हो गया?", श्री सिंघवी ने सवाल किया। उन्होंने कहा कि "आस्था अनमोल है, जवाबदेही ज़रूरी है"। उन्होंने कहा, “आस्था समर्पण मांगती है। लोकतंत्र पारदर्शिता की मांग करता है। पवित्र स्थानों के लिए पवित्र मानकों का पालन होना चाहिए।” श्री सिंघवी ने बताया कि बीजेपी के एक नेता ने माना है कि “चंपत राय केंद्र की पसंद थे। पार्टी के आलाकमान तक उनकी पहुंच है। विपक्ष चाहे कितना भी शोर मचा ले, उनकी स्थिति को हिलाना आसान नहीं है।”

 ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के बीच हुए MoU (समझौता ज्ञापन) और SOPs (मानक संचालन प्रक्रिया) में यह साफ़ तौर पर कहा गया था कि दान पेटी को केवल ट्रस्ट और बैंक के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही खोला जाएगा, हर पेटी की गिनती अलग-अलग होगी, बायोमेट्रिक अटेंडेंस ज़रूरी होगी, और अंदर आने और बाहर जाने, दोनों समय तलाशी ली जाएगी; फिर भी बिना किसी जांच-पड़ताल या निगरानी के यह लूट हो गई।
 
उन्होंने कहा कि राम मंदिर की लूट सिर्फ़ पैसे की बात नहीं है। "यह उस भावना की बात है जो एक माँ के मन में होती है जब वह अपने बेटे की भलाई के लिए दान पेटी में सौ रुपये डालती है। यह उस मज़दूर की बात है जो राम के चरणों में अपनी पूरे दिन की कमाई चढ़ाता है, यह सोचकर कि उसका योगदान मंदिर की सेवा में लगेगा। जब वही पैसा किसी के जूते में, किसी की जेब में या वॉशरूम की दीवार के पीछे छिपा हुआ मिलता है, तो यह सिर्फ़ रुपयों की चोरी नहीं होती, यह भरोसे की चोरी होती है, खुद आस्था की चोरी होती है।"

07:33 pm 11/07/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

editor@dhanustankar.com

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