
दिल्ली: कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी के चेयरमैन मीडिया एंड कम्युनिकेशन पवन खेड़ा जो कि राज्य सभा सांसद भी हैं, ने प्रधानमंत्री को अल्बर्ट पिंटो की संज्ञा दे डाली । उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि यह गुस्सा जाती हुई सरकार का है । उनका कहना है कि उनकी पार्टी आंदोलन एवं चुनाव के जरिये सत्ता में बदलाव चाहती है । इसके लिए निष्पक्ष चुनाव जरूरी है । उनकी पार्टी हर उस आंदोलन के साथ है जो संविधान बचाने के लिए किया जाए । उन्होंने दावा किया है कि शासन तंत्र से जुड़े 200 अधिकारी उनके साथ हैं एवं हाल ही में हुई गृहमंत्री अमित शाह की समाचार पत्रों के संपादकों की बैठक की कार्यवाही की जानकारी उन्हें शामिल पत्रकारों से मिल ही जाती है ।
पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में मीडिया से रूबरू होकर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 'वोट चोर- गद्दी छोड़' अभियान चलाया ओर आज पूरा देश भी यह खुलकर बोल रहा है। हमें इस 'वोट चोर' सरकार को हराना है, सिस्टम को बदलना है।बीचुनाव के जरिए regime बदलना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राजनाथ सिंह और BJP के नेता इससे नाराज हैं, क्योंकि इन्हें लोकतंत्र की आदत नहीं रही। उनका कहना है कि सच्चाई ये है कि जब भाजपा को लोकतंत्र में सवाल झेलने होते हैं, तो यही लोकतंत्र उन्हें देशद्रोह लगने लगता है।
उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी जी ने एक अच्छी बात कही थी - "It is the Opposition’s duty to oppose, expose and if possible depose. प्रधानमंत्री और उनकी पूरी मंत्रिमंडल को यह बात नागवार गुजरती है। उनको लगता है कि यह तो देशविरोधी है। देश और लोकतंत्र की रक्षा करने वाले लोग यही बात कहेंगे कि वे इस सिस्टम को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह को बताना चाहिए कब ऐसा आंदोलन हुआ, जब विपक्ष ने मांग की है कि इस सरकार को 5 नहीं 10 साल दे दिया जाए। जब हम विपक्ष में थे या फिर ये विपक्ष में थे तब भी ऐसा कभी नहीं हुआ।
जब भी विपक्ष सड़कों पर आता है तो विरोध करने आता है, खुलासा करने आता है और डिपोज करने आता है। इनको चुनाव हराने आता है। यह हमारी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है। अगर आपको इन बातों से आपत्ति है तो संविधान बदल कर दिखा दें। उन्होंने कहा कि कहिए आंदोलन करना और सरकार बदलने की मंशा रखना गैरकानूनी और देशद्रोह है। हमें मालूम है कि इनका मुख्य मकसद संविधान बदलना ही है।