
लखनऊ: दिल्ली में हालिया घर्टनाक्रमों को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने, अराजकता फैलाने और बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की रचने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य चुनाव सुधार नहीं सत्ता हासिल करना है । वह पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे । आपातकाल, 1984 में सिख नरसंहार एवं कारसेवकों पर गोलीबारी का उल्लेख करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाये । उनका कहना है कि पिछले दिनों हुए घटनाक्रम गंभीर सवाल खड़े करते हैं । ऐसा लगता है कि लोकतांत्रिक कार्यों से सामाजिक निर्माण के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों एवं अराजक कार्यों के लिए युवाओं को मोहरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है । एक प्रेस कांफ्रेंस में खुलकर कहा गया है कि रिजीम चेंज के लिए बांग्लादेश से प्रेरणा ली है । इनकी लड़ाई ना तो चुनाव सुधार के लिए है, ना ही एसआईआर के लिए और ना ही नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए है । इनका एकमात्र उद्देश्य अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करना है ।
कांग्रेस के संरक्षण और शासनकाल में तीन सबसे बड़े अक्षम्य अपराध हुए । पहला अपराध 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी थी दूसरा 1984 में कांग्रेस के संरक्षण सिखों का नरसंहार और तीसरा 1990 में राम भक्त कारसेवकों के खून की नदियाँ बहाने वालों को समर्थन देकर उनकी सरकार को बचाना था । चौथा अपराध अब संविधान, संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को चोट पहुंचाकर किया जा रहा है । कांग्रेस के इतिहास का पन्ना खोला जाए तो कई काले अध्याय मिलेंगे । लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि संविधान को जेब में रखकर वह अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं । इलेक्शन कमीशन एवं चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले लोकसभा में नेता विपक्ष को यह भी बताना चाहिये 1993 में चुनाव आयोग में अचानक बदलाव करते हुए रातोंरात दो नए चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे । 2006 में मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने तत्कालीन राष्ट्रपति से पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश की थी । आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस के नेताओं के साथ साँझा की थी । तत्कालीन सरकार ने उन्हें पद पर बरक़रार रखा ओर उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया । यह माना जाता था कि वह नेहरू गांधी परिवार के करीबी थे ।
इतना ही नहीं पाँच दशकों तक देश में बिना वोटर आईडी कार्ड के चुनाव हुए थे । वोटर आई कार्ड जारी होने के बाद कांग्रेस के लिए बहुमत पाना मुश्किल हो गया । स्वयं को गांधी जी का उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाली कांग्रेस आज अराजकता और रिजीम चेंज की बातें करकर अपनी राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहती है । यह कांग्रेस के नैतिक मूल्यों के पतन की प्रकाष्ठा है ।