नई दिल्ली 17, Feb 2026

लेख

1 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

2 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

3 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

4 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

5 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

6 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

7 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

8 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

9 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

10 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

11 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

12 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

13 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

14 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

15 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

16 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

17 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

18 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

19 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

20 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

21 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

22 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

23 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

24 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

25 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

26 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

27 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

28 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

29 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

30 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

31 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

32 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

33 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

34 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

35 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

36 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

37 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

38 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

39 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

40 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

41 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

42 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

43 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

44 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

45 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

46 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

47 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

48 - ठेके आन फिटनेस सेंटर ऑफ छा गए केजरीवाल जी तुस्सी

49 - मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुए पंचतत्वों विलीन

50 - दिल्ली में यमुना का पानी का बीओडी लेवेल 50 के पार

प्रदूषण पर 53052 करोड़ रुपये खर्च 1% भी सुधार नहीं

दिल्ली: पिछले 12 वर्षों में आप पार्टी और बीजेपी की सरकारों के समय प्रदूषण पर खर्च हुए करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार की भैंट ना चढ़ते तो दिल्ली वालों को दमघोटू प्रदूषण ना झेलना पड़ता । दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने निशाना साधते हुए इस दौरान प्रदूषण पर खर्च हुई करोड़ों की राशि की जांच और दोषियों को सजा की माँग  की । देश की राजधानी दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण जनजीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है जो की आप और बीजेपी दोनो पार्टियों की सरकारों के राजनीतिक स्वार्थ का ही परिणाम है कि 2017 से लगातार विश्व में दिल्ली सबसे अधिक जहरीली हवा वाली राजधानी बनी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पॉलूशन कंट्रोल कमेटी की जानकारी के अनुसार 2017 से अक्टूबर 2025 तक दिल्ली में प्रदूषण पर 53052 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके है, लेकिन इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद प्रदूषण में सुधार की दिशा में 1 प्रतिशत भी सुधार दिखाई नही देता, क्या लाखों करोड़ की राशि भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई? इसकी जांच होनी चाहिए।

राजधानी में गंभीर प्रदूषण लगातार बढ़ने के लिए दिल्ली सरकार के साथ केन्द्र सरकार भी बराबर की जिम्मेदार है क्योंकि वर्ष 2024-25 में 858 करोड़ रुपये के बजट का 1 प्रतिशत से कम इस्तेमाल हुआ। यही हाल दिल्ली का है यहां योजनाओं को समय पर लागू न करके आवंटित बजट के मुकाबले खर्च बहुत कम हुआ। दिल्ली सरकार के 2025-26 के बजट में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण पर पर 1885 करोड़ आवंटित किए गए लेकिन प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए मात्र 300 करोड़ रुपये खर्च किए और 506 करोड़ रुपये वृक्षारोपण के लिए खर्च हुए, जबकि यमुना सफाई के लिए 750 करोड़ खर्च हुए।
 
1885 करोड़ के बजट आवंटित होने के बावजूद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कोई ठोस योजना बनाकर दिल्ली का प्रदूषण कम करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। आवंटित बजट होने के बावजूद क्यों प्रदूषण नियंत्रण पर कोई ठोस काम नही हुआ, अगर 300 करोड़ प्रदूषण नियंत्रण, 506 करोड़ वृक्षारोपण और 750 करोड़ यमुना सफाई पर खर्च हुए तो किसी भी क्षेत्र में सरकार का काम दिखाई क्यों नही दे रहा? बजटीय वर्ष खत्म होने में एक महीना बाकी है, लेकिन करोड़ां खर्च होने के बाद वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मैली यमुना जस की तस है। कहीं 1556 करोड़ हुए खर्च में भारी भ्रष्टाचार तो नही, इस पर उपराज्यपाल संज्ञान ले और करोड़ का घोटाला हुआ है तो इसकी जांच कराएं।
 
दोनो ही हर वर्ष नए प्रोपगेंडे के साथ प्रदूषण पर बढ़ चढ़कर बयानबाजी करते रहे है लेकिन कोई ठोस प्रयास या कार्यवाही करके प्रदूषण नियंत्रण करने में कभी सफल नही हुए। जिसके कारण हर वर्ष हजारों लोग सांस, अस्थमा और फेंफड़ों की बीमारी से मौत का शिकार हो रहे है। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा को कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग का प्रयोग के लिए करोड़ों के आवंटन के बावजूद सरकार प्रदूषण कम करने में नाकाम साबित रही क्योंकि क्लाउड सीडिंग का प्रयोग भी विफल साबित रहा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आरटीआई विभाग के चेयरमैन  रामनिवास शर्मा के द्वारा आरटीआई के जवाब में आई जानकारी के अनुसार क्लाउड सीडिंग पर 3793420 रुपये खर्च हुए। आरटीआई के तहत दिल्ली पर्यावरण विभाग और आईआईटी कानपुर में हुए अनुबंध में कितनी राशि किस मद में खर्च हुई आदि जानकारी मांगने पर सरकार द्वारा साफ इंकार करना, दर्शाता है कि कहीं न कही भ्रष्टाचार भी छिपा है। उन्होंने कहा कि 2025-26 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए फंड का आवंटन तो हुआ लेकिन सरकार की उदासीनता और प्रशासनिक निष्क्रियता से जाहिर होता है कि आवंटित फंड प्रभावी ढ़ंग से उपयोग करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जिसके कारण प्रदूषण कम होने की बजाय लगाता बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को आवंटित फंड को उपयुक्त मदों में समय पर खर्च करके लोगों को प्रदूषण से राहत देने के लिए काम करना होगा।
 
उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण जहां जनजीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है वहीं सर्दियों में बढ़ता प्रदूषण और सरकार की पाबंदियों के कारण गरीब, वंचित, दैनिक कमाने वाले दिल्ली के एक करोड़ से अधिक लोगों की अजीविका भी प्रभावित होती है। लेकिन दिल्ली की सरकारों चाहे भाजपा हो या आम आदमी पार्टी, इन्हें अपने राजनैतिक हित के अलावा किसी की चिंता नही है।

 

06:18 pm 11/01/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

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