
दिल्ली: आदमी पार्टी में लगातार बढ़ रहे अंदरूनी असंतोष पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है अपने नेताओं से राघव चड्ढा के विरूद्ध ब्यान दिलवा कर “आप” नेता अरविंद केजरीवाल केवल बाहर से पार्टी को एकजुट दिखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अंदर से पार्टी पूरी तरह बिखर चुकी है। राघव चड्ढा का वीडियो बयान भी इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर संवाद और लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब एक वरिष्ठ सांसद को अपनी ही पार्टी में अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया जैसे मंच का सहारा लेना पड़े, तो यह उस पार्टी की बिगड़ी आंतरिक स्थिति का गंभीर संकेत है।
उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सुश्री स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे और अब राघव चड्ढा जैसे प्रमुख चेहरा भी दूरी बनाते दिख रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व मे भी अनेक 'आप' नेताओं के साथ हुए घटनाक्रम और उनकी असहमति भी यह दर्शाती है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी अब एक व्यक्ति केंद्रित संगठन बनकर रह गई है, जहां न तो विचारों की स्वतंत्रता है और न ही आंतरिक लोकतंत्र। जो भी नेता अपनी स्वतंत्र राय रखने की कोशिश करता है, उसे या तो किनारे कर दिया जाता है या दबाने का प्रयास किया जाता है।
राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाना और उनके बोलने के अधिकार तक सीमित करने की कोशिश करना इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व आलोचना से डरता है और असहमति को स्वीकार करने का साहस नहीं रखता। यदि अरविंद केजरीवाल में नैतिक साहस होता, तो वे असहमति रखने वाले नेताओं के साथ संवाद करते या स्पष्ट निर्णय लेते। लेकिन इसके विपरीत, वे लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं जो उनकी कमजोर और असुरक्षित नेतृत्व शैली को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की स्थापना जिन सिद्धांतों—पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र— पर हुई थी, आज वही सिद्धांत पार्टी के भीतर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। यही कारण है कि एक के बाद एक वरिष्ठ नेता या तो पार्टी से दूरी बना रहे हैं या खुलकर असंतोष जता रहे हैं।
दिल्ली की जनता अब “आप” की वास्तविकता को समझ चुकी है और यह स्पष्ट है कि यह पार्टी अब केवल सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, न कि जनता की सेवा के लिए। अरविंद केजरीवाल राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर हैं जिन्हें विपक्ष का सामना करने की आदत नहीं है चाहे वह विपक्षी दलों से हो या पार्टी के भीतर। साथ ही उन्होंने राघव चड्ढा के लिए कहा कि - जिंदगी पर सिर्फ इतना ही लिख पाया हूँ मेरे बहुत मजबूत रिश्ते थे कमजोर लोगों से।