एनसीआरबी आंकड़ों ने खोली महिला सुरक्षा की पोल
दिल्ली: महिला कांग्रेस ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार के शासन में देश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति भयावह हो चुकी है और अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने बताया कि 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 42,85,888 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि 42 लाख से अधिक वो महिलाएं और बच्चियां हैं जो एक दशक में दरिंदगी का शिकार हुई हैं और न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जहां सालाना अपराध का आंकड़ा 3 लाख 40 हजार था, वहीं 2024 में यह बढ़कर लगभग 4 लाख 42 हजार हो गया है। देश में रोजाना 10 दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो रहा है। हर 70 मिनट में एक बच्ची या महिला दुष्कर्म का शिकार हो रही है।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली का उल्लेख करते हुए महिला सुरक्षा की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा का ‘बेटी बचाओ’ का नारा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का 'नारी वंदन' तो बहाना है, उसे नारी सुरक्षा के नाम पर मात्र घड़ियाली आंसू बहाना है, अपने खास नेताओं को सजा से बचाना है और साथ ही एपस्टीन फाइल्स से भी ध्यान भटकाना है। महिला अपराधों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले राज्यों का विवरण देते हुए उन्होंने भाजपा की डबल इंजन सरकार के मॉडल को विफल बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश महिला अपराध के 66,000 मामलों के साथ देश में नंबर एक पर है। इसके बाद महाराष्ट्र लगभग 48,000 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। राजस्थान करीब 36,000 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश व बिहार में महिला अपराध के क्रमशः लगभग 32,000 और 27,000 मामले दर्ज किए गए हैं।देश की राजधानी दिल्ली भी सुरक्षित नहीं है और अपराध के मामले में शीर्ष राज्यों की श्रेणी में शामिल है। उन्होंने बताया कि देश में सबसे अधिक अपराध दलित और आदिवासी महिलाओं के खिलाफ हो रहे हैं।
अलका लांबा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में नाबालिग बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म की घटना का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भाजपा नेता समेत तीन पर मामला दर्ज है, लेकिन पुलिस दबाव बना रही है और परिवार को समझौते के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पीड़िता के पिता को हिरासत में ले लिया और बच्ची को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा, जबकि आरोपी खुले घूम रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धन-बल से सरकार की छवि बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं; अंकिता भंडारी हो या चंपावत की बच्ची, उन्हें उत्तराखंड की भाजपा सरकार में न्याय नहीं मिल सकता, इसीलिए उन्हें न्याय दिलाने के लिए राज्य से बाहर मामले की निष्पक्ष जांच करवानी होगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के भाजपा विधायक हंसराज पर दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि भाजपा उसे बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। उन्होंने बिहार के पटना में हाल ही में नाबालिग लड़की के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना का जिक्र किया। उन्होंने बिहार की एक अन्य दिल दहला देने वाली घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसे मुख्यमंत्री आवास से कुछ दूरी पर कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया था।
2002 के बिलकिस बानो मामले में दोषियों की सजा माफ करने वाला गुजरात मॉडल अब पूरे देश में लागू हो गया है, जिसमें सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में फांसी की बजाय उम्रकैद होती है और बाद में रिहाई हो जाती है। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा ने मांग की कि जुलाई में होने वाले संसद के आगामी मॉनसून सत्र में एनसीआरबी के आंकड़ों पर चर्चा हो और सरकार केवल अपराध के आंकड़े न दे, बल्कि यह भी बताए कि अब तक कितनी पीड़िताओं को न्याय मिला है और विशेषकर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में कितने अपराधियों को फांसी की सजा दी गई है।छ
06:54 pm 08/05/2026