नई दिल्ली 11, May 2026

लेख

1 - रक्त रंजित राजनीति से मिली मुक्ति बंगाल में पहली बार निखरा कमल

2 - कैसे होंगे केरल के सियासी समीकरण

3 - कौन सा खेला खेलेंगी ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में

4 - धर्मेंद्र हुए पंचतत्व में विलीन

5 - बिहार की जानता ने फिर एक बार साबित कर दिया कि हथेली में सरसों नहीं उगाया जा सकता

6 - जेट सिक्योरिटी के साथ विसर्जन के लिए निकला लाल बाग का राजा

7 - खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

8 - एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिये योग

9 - ऑपरेशन सिंदूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा

10 - देश के लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए बाबा साहिब का अमूल्य योगदान

11 - दिल्ली सरकार के 100,000करोड़ से क्षेत्र में उन्नति की संभावनाओं को मिलेगी मजबूती

12 - दशक के बाद बिखरा झाड़ू 27 साल बाद खिला कमल फिर एक बार

13 - स्वर्णिम भारत,विरासत और इतिहास पर आधारित इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह

14 - महाराष्ट्र में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

15 - तमाम कवायदों के बावजूद बीजेपी तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाने को अग्रसर

16 - श्रॉफ बिल्डिंग के सामने कुछ इस अंदाज से हुआ लाल बाग के राजा का स्वागत

17 - प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही शुरू हुआ बीजेपी का सदस्यता अभियान

18 - देश के सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों में भी दिखा 78 वें स्वतंत्रता दिवस का जज्बा

19 - २०२४-२५ के बजट को लेकर सियासत विपक्ष आमने सामने

20 - एक बार फिर तीसरी पारी खेलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी

21 - केजरिवाल के जमानत पर रिहा होने पर शुरु हुई नई कवायदें

22 - मतदान की दर धीमी आखिर माजरा क्या

23 - क्यूं चलाना चाहते हैं केजरीवाल जेल से सरकार

24 - 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में वामपंथी उग्रवाद-संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 69 % कमी

25 - कर्तव्य पथ दिखी शौर्य की झलक

26 - फ़ाइनली राम लल्ला अपने आशियाने में हो गये हैं विराजमान

27 - राजस्थान का ऊँट किस छोर करवट लेगा

28 - एक बार फिर गणपति मय हुई माया नगरी मुंबई

29 - पत्रकारिता की आड़ में फर्जीवाड़े के खिलाफ एनयूजे(आई) छेड़ेगी राष्ट्रव्यापी मुहीम

30 - भ्रष्टाचार, तुस्टिकरण एवं परिवारवाद विकास के दुश्मन

31 - एक बार फिर शुरू हुई पश्चिम बंगाल में रक्त रंजित राजनीति

32 - नहीं होगा बीजेपी के लिऐ आसान कर्नाटक में कांग्रेस के चक्रव्यूह को भेद पाना

33 - रद्द करने के बाद भी नहीं खामोश कर पायेंगे मेरी जुबान

34 - उत्तर-पूर्वी राज्यों के अल्पसंख्यकों ने एक बार फिर बीजेपी पर जताया भरोसा

35 - 7 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री

36 - गुजरात में फिर एक बार लहराया बीजेपी का परचम

37 - बीजेपी आप में काँटे की टक्कर

38 - सीमित व्यवस्था के बावजूद धूम-धाम से हो रही है छट माइय्या की पूजा

39 - जहाँ आज भी पुजा जाता है रावण

40 - एक बार फिर माया नगरी हुई गणपतिमय

41 - एक बार फिर लहराया तिरंगा लाल किले की प्राचीर पर

42 - बलवाइयों एवं जिहादियों के प्रति पनपता सहनभूतिक रुख

43 - आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी के रूप में मनाया जा रहा है 8 वाँ विश्व योग दिवस

44 - अपने दिग्गज नेताओं को नहीं संभाल पाई कांग्रेस पार्टी

45 - ज्ञान व्यापी मस्जिद के वजु घर में शिवलिंग मिलने से विवाद गहराया

46 - आखिर क्यूँ मंजूर है इन्हे फिर से वही बंदिशें.....

47 - पाँच में से चार राज्यों में लहराया कमल का परचम

48 - पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर एवं खाद्य सामाग्री पर मिलने वाली राहत में लगभग 27 फीसदी की कटौती

49 - जे&के पुलिस के सहायक उप निरीक्षक बाबूराम शर्मा मरणोपरांत अशोक चक्र से संमानित

50 - आखिर कौन होंगे सत्ता के इस महाभोज के सिकंदर

16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र का बुलाया जाना राजनीति से प्रेरित

दिल्ली: 16 से 18 अप्रैल को  लोक सभा एवं राज्य  सभा के विशेष सत्र का बुलाया जाने को चुनावी आचार संहिता का उलंघन बताते हुए कांग्रेस पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन एवं राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने  कहा कि तमिलनाडु एवं पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव सिर पर हैं  ऐसे में विशेष सत्र का आयोजन राजनीतिक लाभ से प्रेरित है । मामले पर खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि  गत 16 मार्च को संसदीय कार्य विभाग के मंत्री किरण रिज्जू का ख़त  नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के  पास आता है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में कुछ संशोधन के लिए केंद्रीय सरकार कांग्रेस पार्टी से चर्चा करना चाहता है । ख़त मिलने के 15  मिनट बाद कांग्रेस अध्यक्ष जवाबी खत लिखा कि आप एक ऑल पार्टी मीटिंग बुलाइए और इस ऑल पार्टी मीटिंग में बातचीत करेंगे, आपकी ओर से क्या प्रस्ताव है? आप लिखित में दीजिएगा... जुबानी प्रस्ताव नहीं चाहिए, लिखित में आपका क्या प्रस्ताव है? अधिनियम को लेकर, संशोधन को लेकर और हम बातचीत करेंगे।

24 मार्च को 8 दिन बाद सारी विपक्ष पार्टी, सारी विपक्ष पार्टी, केवल तृणमूल इसमें शामिल नहीं था, पर तृणमूल सहमत थी इस खत से। राहुल जी, खरगे जी, सभी नेताओं ने किरेन रिजि‍जू को वापस खत लिखा कि आप कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट करना चाहते हैं, 30 महीने बाद आप को ज्ञान आया है कि संशोधन की जरूरत है, उसके बारे में मैं बातचीत करूंगा, पर आप एक ऑल पार्टी मीटिंग फिर से बुलाइए। पर 24 मार्च को सारी विपक्ष पार्टियों ने सर्वसम्मति से कहा कि 29 अप्रैल के बाद ऑल पार्टी मीटिंग बुलाइए। क्योंकि 29 अप्रैल तक इलेक्शन कमीशन का मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होगा... चुनाव प्रचार में सभी पार्टियां व्यस्त हैं, पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं... तो इसलिए 29 अप्रैल के बाद आप ऑल पार्टी मीटिंग बुलाइए।

कल  राज्यसभा में, सिर्फ वुमेन्सह रिजर्वेशन बिल को लेकर बहस  हुई, सिर्फ नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन की बात की गई।  खत में किरन रिज्जू  सिर्फ वुमेन्सश रिजर्वेशन बिल की बात करते हैं। पर अभी साफ हो गया है कि यह विशेष सत्र केवल महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर नहीं है, बल्कि परिसीमन को भी लेकर है। यह कभी परिसीमन की चर्चा नहीं हुई, कभी किरेन रिजि‍जू ने हमें नहीं कहा कि परिसीमन भी एजेंडा पर है, डीलिमिटेशन एजेंडा पर है। सिर्फ नारी शक्ति, नारी शक्ति, नारी शक्ति का मंत्र जपते रहे, परिसीमन की बात उठाई नहीं। पर अभी साफ हो गया है कि इस तीन दिन में, जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम है, जो सितंबर 2023 में पारित किया गया था लोकसभा में और राज्यसभा में सर्वसम्मति से, उसमें 30 महीने के अंदर संशोधन लाया जाएगा और परिसीमन को भी लेकर संविधान में संशोधन किया जाएगा। तो यह बात साफ हो गई है कि यह दो विषय आएंगे इन तीन दिन के विशेष सत्र में।

22 और 23 सितंबर, 2023 को यह जो नया कन्वेंशन सेंटर है, जिसको हम न्यू पार्लियामेंट हाउस कहते हैं उसका उद्घाटन हुआ था और उद्घाटन करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया गया... नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर और वो अधिनियम क्या था? वह अधिनियम था कि यह एक तिहाई रिजर्वेशन, एक तिहाई आरक्षण महिलाओं को और रिजर्वेशन, विद इन रिजर्वेशन 1/3 टोटल में और 1/3 शेड्यूल कास्ट सीटों में और 1/3 आदिवासी सीटों में महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। पर इस अधिनियम में लिखा गया था कि यह लागू किया जाएगा परिसीमन और जनगणना के बाद में। अगर आप देखें अनुच्छेद 334(1),  आर्टिकल 334(1) शामिल किया गया हमारे संविधान में कि यह महिला आरक्षण और आरक्षण विदइन आरक्षण तभी लागू होगा जब परिसीमन और जनगणना खत्म होगी। 

उस समय कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने भाषण में कहा - यह आप तुरंत लागू क्यों नहीं करते? आप 2024, के लोकसभा से लागू क्यों नहीं करते? इसके लिए परिसीमन और कोई जनगणना की जरूरत नहीं है, आप तुरंत लागू कीजिए। पर लंबी चौड़ी कहानी सुना दी गई। सभी लोगों ने कहा सरकार की ओर से कि नहीं परिसीमन करना अनिवार्य है, जनगणना करना अनिवार्य है और इसीलिए अधिनियम अभी आप पारित कीजिए... कब लागू होगा हम आपको बाद में बताएंगे।

30 महीने तक सोते रहे, 30 महीने हो गए हैं। खरगे जी ने जो भाषण दिया था यह रिकॉर्ड में है, उन्होंने मांग की थी कि आप जानबूझकर इसको आगे हटा रहे हैं, डिले कर रहे हैं, देरी कर रहे हैं... आपकी मंशा सही है तो आप 2लोकसभा में भी महिला आरक्षण ला सकते हैं, वो नहीं हुआ। अचानक सरकार ने यह तय किया कि नहीं-नहीं अभी नहीं हो सकता है, क्योंकि जो जनगणना अभी शुरू हुई है यह 2029 तक इसके नतीजे नहीं आएंगे। मैं आपको एक वीडियो प्ले करता हूं… 30 मार्च को गृह मंत्रालय के एक बड़े वरिष्ठ अधिकारी मृत्युंजय नारायण, जो हमारे रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर हैं। उन्होंने एक प्रेस वार्ता में एक सवाल पूछा गया कि जनगणना के नतीजे कब आएंगे? और सुनिए, देखिए तीन दिन पहले भारत के महा रजिस्ट्रार और जनसंख्या आयुक्त ने कहा कि  2027 में ही जनगणना के नतीजे आने लगेंगे और वो सरकार के पास आ जाएंगे, उपलब्ध होंगे 2027 में। तो यह कहना कि 3 साल लगेंगे, 4 साल लगेंगे... आज तो डिजिटल इंडिया का जमाना है और यह डिजिटल सेंसस है, उसका श्रेय तो प्रधानमंत्री ले रहे हैं। 

विपक्ष 16 अप्रेल से पहले विपक्ष के सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करेगा।

06:54 pm 03/04/2026

संपादक

डा. अशोक बड़थ्वाल

Mobile : 91-9811440461

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