
दिल्ली: इंदिरा भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह और उनकी पार्टी एवं पूरा विपक्ष छात्रों एवं उनकी मांगों के साथ मजबूती से खड़े हैं । उन्होंने देश प्रधान मंत्री से ताकीद की है कि वह अहंकार को छोड़कर छात्रों की गूँज सुने एवं उनकी तीन मांगों को पूरा करें । यह तीन माँगे हैं नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का तत्काल इस्तीफ़ा, छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए गुनहगारों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और अंत में छात्रों के साथ हुए अन्याय के लिए उनसे माफी ।
उनका कहना है कि बीजेपी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को तबाह कर दिया गया है। 152 पेपर लीक हुए, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए लेकिन किसी एक को भी सजा नहीं मिली यही कारण है कि देश के लाखों छात्र विरोध प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। देश का कमिटमेंट होना चाहिए कि वह एजुकेशन के बाद युवाओं को नौकरी देगा, रोजगार देगा और अच्छा भविष्य देगा। लेकिन आज सारे दरवाजे बंद कर सिर्फ सरकारी नौकरी का दरवाजा खोल दिया जाता है।सरकारी नौकरी के सिस्टम में लाखों रूपए मांगे जाते हैं। जो यहां पैसे देगा, जिसकी पहचान होगी, वही इस दरवाजे से अन्दर जाएगा।
उन्हें लगा कि अगर देश के छात्र सड़क पर हैं तो विपक्ष को भी सड़क पर होना चाहिए। लेकिन प्रधान मंत्री आवास जाने से पहले वह विपक्ष स्पीकर के पास गये । उन्होंने उनसे सदन में छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करवाने की मांग की। स्पीकर ने कहा कि वे सरकार से बात करेंगे, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ और मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया गया। इसीलिए, वो चाहते हैं- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। जिन लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की और उनका अपमान किया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, नरेंद्र मोदी छात्रों के साथ हुए व्यवहार के लिए माफी मांगें।
उनका कहना है कि उनका काम भारत की लोगों की इच्छा को जाहिर करना है । चाहें वो छात्र हों , युवा हों या फिर किसान लोकसभा में नेता विपक्ष के तौर पर उन्हें यही काम करना है । उन्हें भारत के लोगों की आवाज बनना है । जहाँ भी लोगों को तकलीफ़ हो रही है उन्हें उसपर ध्यान दिलाना है । अपने लोगों की इच्छाओं के साथ खड़ा होना उनके लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है ।